
Jamshedpur : झारखंड में सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एक ओर खनिज सामग्री पर रॉयल्टी कटौती को लेकर असमंजस है, तो दूसरी ओर बिटुमेन समेत निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों ने ठेकेदारों की लागत बढ़ा दी है। इन समस्याओं के खिलाफ अब कोल्हान के ठेकेदारों ने एकजुट होकर सरकार के सामने अपनी बात रखने की तैयारी की है।
इसी सिलसिले में रविवार को जमशेदपुर के सीएच एरिया स्थित निर्मल गेस्ट हाउस में कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ की बैठक हुई। इसमें पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां के 100 से अधिक ठेकेदार शामिल हुए। बैठक में रॉयल्टी कटौती की प्रक्रिया, निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों और सरकारी शेड्यूल ऑफ रेट (SOR) में बदलाव नहीं होने से पैदा हो रही परेशानियों पर चर्चा की गई।
एक ही सामग्री पर दो बार रॉयल्टी कटौती का डर
बैठक में ठेकेदारों ने कहा कि बालू, गिट्टी और अन्य खनिज आधारित निर्माण सामग्री खरीदते समय नियमानुसार रॉयल्टी का भुगतान किया जाता है। इसके बावजूद सरकारी निर्माण कार्यों के बिल का भुगतान करते समय दोबारा रॉयल्टी काटे जाने की आशंका बनी रहती है।
ठेकेदारों का सवाल है कि जब सामग्री खरीदने के दौरान ही रॉयल्टी जमा कर दी जाती है, तो उसी सामग्री के इस्तेमाल के आधार पर भुगतान के समय फिर कटौती क्यों होनी चाहिए। इससे ठेकेदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को स्पष्ट करने और विभागीय स्तर पर एक समान दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। उनका कहना है कि नियमों में पारदर्शिता नहीं होने के कारण भुगतान के समय अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है।
बिटुमेन की कीमतों ने बिगाड़ा निर्माण कार्यों का गणित
बैठक में सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की बढ़ती कीमतों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। ठेकेदारों के अनुसार, सरकारी SOR के आधार पर टेंडर लेने के बाद बाजार में निर्माण सामग्री की कीमतें बढ़ जाती हैं। ऐसे में टेंडर की निर्धारित दर और वास्तविक लागत के बीच बड़ा अंतर पैदा हो जाता है।
खासकर बिटुमेन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से सड़क निर्माण कार्यों की लागत प्रभावित हो रही है। ठेकेदारों का कहना है कि बाजार की मौजूदा दरों के मुकाबले सरकारी दरें कम पड़ने पर तय बजट में गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करना चुनौती बन जाता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि निर्माण सामग्री की बाजार कीमतों की नियमित समीक्षा हो और जरूरत के अनुसार SOR में संशोधन किया जाए। इससे ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान से बचाने के साथ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी बनाए रखी जा सकेगी।
2 नवंबर को मंत्री दीपक बिरुआ और विधायकों से होगी मुलाकात
अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ का प्रतिनिधिमंडल सोमवार, 2 नवंबर को झारखंड सरकार के मंत्री दीपक बिरुआ और कोल्हान के विधायकों से मुलाकात करेगा। यह बैठक दोपहर 1:30 बजे जमशेदपुर के सर्किट हाउस में निर्धारित है।
प्रतिनिधिमंडल इस दौरान रॉयल्टी कटौती की प्रक्रिया, खनिज सामग्री की खरीद पर पहले से जमा रॉयल्टी, भुगतान के समय दोबारा कटौती की आशंका और बिटुमेन की बढ़ती कीमतों से जुड़े मुद्दे उठाएगा।
संघ की ओर से मांग की जाएगी कि रॉयल्टी कटौती को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाए जाएं। साथ ही निर्माण सामग्री की बाजार दरों के अनुरूप सरकारी SOR में संशोधन किया जाए, ताकि ठेकेदारों को वास्तविक लागत के मुताबिक काम करने का अवसर मिल सके।
विकास योजनाओं की रफ्तार पर भी पड़ सकता है असर
ठेकेदारों का कहना है कि सड़क, पुल-पुलिया, भवन और दूसरी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन लागत बढ़ने और भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं में स्पष्टता नहीं होने से काम करना मुश्किल होता जा रहा है।
उनका मानना है कि ठेकेदारों की समस्याओं का असर केवल उनके कारोबार पर नहीं, बल्कि सरकारी विकास योजनाओं की गति और निर्माण की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। रविवार की बैठक में शामिल ठेकेदारों ने एकजुट होकर अपनी मांगें सरकार के सामने रखने पर सहमति जताई। अब सबकी नजरें 2 नवंबर को होने वाली बैठक पर टिकी हैं। संघ को उम्मीद है कि मंत्री और विधायकों के साथ बातचीत में इन समस्याओं के समाधान का रास्ता निकलेगा।
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