रांची : झारखंड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। राज्य सरकार की ओर से गठित कमेटी ने ऐसी नई नियमावली का मसौदा तैयार किया है, जिसके अनुसार अब वित्त रहित माध्यमिक विद्यालयों और इंटर कॉलेजों में नौवीं से 12वीं तक पढ़ाई कराई जा सकेगी।
अभी माध्यमिक विद्यालयों में केवल नौवीं और 10वीं की पढ़ाई होती है, जबकि इंटर कॉलेजों में 11वीं और 12वीं की कक्षाएं चलती हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दोनों तरह के संस्थानों को “माध्यमिक विद्यालय” माना जाएगा और वहां 9वीं से 12वीं तक पढ़ाई होगी।
कमेटी ने इसके लिए “झारखंड माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 9-12) स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति नियमावली-2026” लागू करने की सिफारिश की है। इसमें स्कूलों को मान्यता देने के लिए कई नई शर्तें तय की गई हैं।
जमीन एवं अन्य शर्तें
नियमावली के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल के लिए कम से कम दो एकड़ और शहरी क्षेत्रों में एक एकड़ जमीन होना जरूरी होगा। जमीन स्कूल के नाम निबंधित या कम से कम 30 साल की लीज पर होनी चाहिए। इसके अलावा स्कूल में पर्याप्त वर्ग कक्ष, प्रधानाचार्य कक्ष, कार्यालय, पुस्तकालय, कॉमन रूम, प्रयोगशाला और खेल मैदान जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य होंगी। पुस्तकालय में कम से कम 50 हजार रुपये की किताबें रखने का प्रावधान किया गया है।
शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भी नई शर्तें तय की गई हैं। अब शिक्षकों का स्नातकोत्तर प्रशिक्षित होना जरूरी होगा। नियुक्ति में राज्य सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। नई नियमावली का वित्त रहित शिक्षा मोर्चा ने विरोध शुरू कर दिया है। मोर्चा का कहना है कि शर्तें बहुत कठोर हैं और इससे कई छोटे संस्थान बंद होने की स्थिति में आ जाएंगे। इसे लेकर सोमवार को रांची के धुर्वा स्थित सर्वोदय बाल निकेतन उच्च विद्यालय में बैठक बुलाई गई है।
मोर्चा से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि सरकारी और वित्त रहित स्कूलों के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए। उनका कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों के लिए एक एकड़ जमीन की शर्त है तो वित्त रहित संस्थानों के लिए भी वही नियम लागू होना चाहिए। मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि नियमावली में भेदभाव किया गया तो राज्यभर में जोरदार विरोध किया जाएगा।

