
15वें वित्त आयोग में झारखंड को 6,585 करोड़ मिलने थे, 5,907.88 करोड़ ही जारी हुए
रांची : झारखंड की पंचायतों को 15वें वित्त आयोग की पूरी राशि नहीं मिल सकी। आयोग की अवधि खत्म हो चुकी है, लेकिन 677.12 करोड़ रुपये अब भी जारी नहीं हो पाए। राशि नहीं मिलने का असर पंचायतों में चलने वाली विकास योजनाओं पर पड़ा है। अब पंचायतों को 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि का इंतजार है।
केंद्र सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 2021-26 की अवधि में झारखंड के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 15वें वित्त आयोग से 6,585 करोड़ रुपये का प्रावधान था। इसके विरुद्ध 5,907.88 करोड़ रुपये ही जारी किए जा सके। शेष 677.12 करोड़ रुपये निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी नहीं होने के कारण जारी नहीं हो सके।
हालांकि, वित्त आयोग की किस्तों के रूप में राज्य को राशि मिलती रही। वित्त वर्ष 2024-25 की अप्रतिबंधित अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में फरवरी 2026 में 275.12 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। यह राशि 24 जिला पंचायतों, 253 प्रखंड पंचायतों और 4,342 ग्राम पंचायतों के लिए थी। इसके बाद 2025-26 की पहली किस्त के रूप में मार्च 2026 में 269.03 करोड़ रुपये भी जारी किए गए।
राशि अटकी तो गांव के काम पर पड़ा असर
15वें वित्त आयोग की राशि से पंचायतों में स्थानीय जरूरत के कई काम कराए जाते हैं। राशि की कमी के कारण नाली निर्माण, पेयजल, स्वच्छता, जल निकासी, छोटी सड़कों की मरम्मत और पंचायत स्तर की दूसरी बुनियादी योजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई। कई जगह योजनाएं तैयार होने के बावजूद राशि की उपलब्धता के अनुसार ही काम आगे बढ़ सका। कुछ कामों को दूसरे मद की राशि से पूरा करने की कोशिश करनी पड़ी।
पंचायत स्तर पर इसका असर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वित्त आयोग की राशि का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर तय जरूरतों के अनुसार किया जाता है। ऐसे में राशि समय पर नहीं मिलने से पंचायतों के पास उपलब्ध विकास निधि सीमित हो गई और नई योजनाएं लेने की क्षमता भी प्रभावित हुई। अब लंबित राशि के स्थान पर 16वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि से विकास कार्यों को गति देने की तैयारी है।
जीटीसी समेत औपचारिकताओं से जुड़ा मामला
विभागीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र से राशि जारी करने के लिए ग्रांट ट्रांसफर सर्टिफिकेट (जीटीसी) समेत जरूरी दस्तावेज मांगे गये थे। समय पर जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं होने से राशि अटक गई। ग्रामीण विकास विभाग और पंचायती राज विभाग की ओर से केंद्र से राशि जारी करने को लेकर पत्राचार भी किया गया, लेकिन 15वें वित्त आयोग की अवधि समाप्त होने तक पूरी राशि नहीं मिल सकी।
अब 16वें वित्त आयोग से उम्मीद
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए 16वें वित्त आयोग की राशि महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध राशि से फिलहाल पंचायतों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। नए वित्त आयोग की राशि मिलने के बाद गांवों में लंबित और नयी योजनाओं को गति देने की उम्मीद है।

