
धनबाद : झारखंड के निजी स्कूलों की जमीन से जुड़ी बाध्यताओं और मान्यता के नियमों का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। इस अहम कानूनी विवाद पर अब 26 अक्तूबर को सुनवाई तय की गई है। इस मामले को लेकर राज्यभर के निजी शिक्षण संस्थानों और प्रबंधनों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं।
जानकारी के मुताबिक, झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने इस मामले में सक्रिय रूप से पक्षकार बनने के लिए एक विशेष अनुमति याचिका पर आवेदन दाखिल किया है। एसोसिएशन के धनबाद जिला सचिव इरफान खान ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 अक्तूबर को होगी, जिसमें स्कूलों के हितों को मजबूती से रखा जाएगा।
जमीन की शर्तें बनीं सबसे बड़ी चुनौती
एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव रामरंजन कुमार सिंह का कहना है कि झारखंड में शिक्षा का अधिकार अधिनियम की पहली संशोधित नियमावली, 2019 के अंतर्गत निजी स्कूलों के लिए जो भूमि संबंधी शर्तें तय की गई हैं, वे जमीनी स्तर पर बेहद व्यावहारिक और कठिन साबित हो रही हैं। कई स्कूलों के पास मानक के अनुरूप जमीन उपलब्ध न होने के कारण उन्हें वैध मान्यता हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूल संघ का मुख्य प्रयास यही है कि सरकार या अदालत के स्तर से इन भूमि संबंधी बाध्यताओं को या तो पूरी तरह समाप्त किया जाए या फिर इनमें ऐसी राहत दी जाए जिससे छोटे और मध्यम स्कूल भी आसानी से संचालित हो सकें। एसोसिएशन के अधिकृत वकील सुप्रीम कोर्ट में इन तमाम व्यावहारिक परेशानियों को प्रभावी ढंग से रखेंगे, ताकि सूबे के निजी विद्यालयों का भविष्य सुरक्षित हो सके और वे बिना किसी कानूनी अड़चन के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जारी रख सकें।
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