
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित सीजीएल-2023 परीक्षा में हुई गड़बड़ी की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। इस पूरे मामले में सीआईडी की जांच से यह साफ हो गया है कि अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर एक बहुत बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था। इस गिरोह का तरीका बेहद ही शातिराना था। परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को एक जगह इकट्ठा किया जाता था, उन्हें प्रश्न-उत्तर रटाए जाते थे और फिर सारे सबूत जलाकर राख कर दिए जाते थे।
पटना के मकान में रटाए जाते थे उत्तर
मामले की सुनवाई के दौरान रांची स्थित एजेसी-1 योगेश कुमार की अदालत में अभियोजन पक्ष ने चौंकाने वाले तथ्य रखे। सीआईडी के अनुसार, 20 सितंबर 2024 को दर्जनों अभ्यर्थियों को पटना के गांधी मैदान और बुद्ध स्मृति पार्क के पास बुलाया गया। इसके बाद उन्हें एक गुप्त मकान में ले जाया गया, जहां प्रश्नपत्र के तीन सेट और उनके उत्तर पहले से मौजूद थे। अभ्यर्थियों को करीब तीन घंटे तक इन सवाल-जवाबों को रटने के लिए कहा गया। जैसे ही रटने का काम पूरा हुआ, फर्जीवाड़े में इस्तेमाल हुए सभी कागजातों को तुरंत जलाकर नष्ट कर दिया गया, ताकि पुलिस या जांच एजेंसी के हाथ कोई सबूत न लग सके। इसके बाद सभी छात्रों को अलग-अलग रास्तों से रवाना कर दिया गया।
गारंटी के तौर पर जमा कराते थे ओरिजिनल सर्टिफिकेट और चेक
जांच में यह भी सामने आया है कि यह सिंडिकेट केवल पेपर उपलब्ध कराने तक ही सीमित नहीं था। अभ्यर्थियों का विश्वास जीतने और पैसे वसूलने के लिए उनसे ओरिजिनल एजुकेशनल सर्टिफिकेट्स और बैंक चेक ‘सुरक्षा’ (मनी बांड) के तौर पर जमा कराए जाते थे। परीक्षा का परिणाम आने तक पैसे के भुगतान की शर्तें तय होती थीं। बैंक ट्रांसफर से लेकर नकद में लाखों रुपये का लेन-देन किया जाता था।
पुस्तकालय से शुरू हुआ बिचौलिए का नेटवर्क
इस मामले में आरोपी संजय कुमार की भूमिका मुख्य बिचौलिए के तौर पर सामने आई है। सीआईडी के मुताबिक,संजय की पहचान एक लाइब्रेरी में अजय कुमार नाम के व्यक्ति से हुई थी। इसके बाद संजय ने अपने दोस्तों और परिचितों के जरिए जेएसएससी परीक्षार्थियों को जोड़ना शुरू किया। इसके बाद पटना के भिखना पहाड़ी स्थित कृष्णा डिफेंस एकेडमी के संचालक राकेश रंजन से संपर्क कर अभ्यर्थियों के लिए सेटिंग कराई गई। जांच रिपोर्ट में संजय के बैंक खाते में अमित कुमार नाम के अभ्यर्थी द्वारा लगभग तीन लाख रुपये भेजे जाने का भी जिक्र है।
कई शहरों और राज्यों में फैले थे तार
सीआईडी की जांच से स्पष्ट हुआ है कि यह नेटवर्क सिर्फ झारखंड या पटना तक सीमित नहीं था। इसके तार बोकारो के दुग्धा, पश्चिम बंगाल के नियामतपुर व सितुलपुर और नेपाल के बीरगंज तक फैले हुए थे। विभिन्न परीक्षा केंद्रों, जैसे कि धनबाद के कुमार बीएड कॉलेज और रातू के मखमंदरो केंद्र पर भी संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिली थीं।
कोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी
सुनवाई के दौरान संजय कुमार ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें केवल संदेह के आधार पर फंसाया गया है। हालांकि, सरकारी वकील की दलीलों और केस डायरी के सबूतों को देखते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है। आरोपी की भूमिका सिर्फ लोगों को मिलाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह पूरी साजिश का अहम हिस्सा था। इन्हीं आधारों पर अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 को आरोपी संजय कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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