
रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल-2023 परीक्षा में हुए बड़े फर्जीवाड़े से पर्दा उठने लगा है। सीआईडी की तफ्तीश में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। परीक्षा का प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसी का एक साधारण कर्मचारी ही इस पूरे खेल का सबसे मुख्य किरदार निकला। उसने न केवल परीक्षा के सवाल और जवाब अपने दिमाग में पूरी तरह छाप लिए, बल्कि इसी के दम पर परीक्षा देकर खुद सहायक अनुभाग अधिकारी की नौकरी भी हासिल कर ली।
अंदर की पहुंच और सवाल रटने का खेल
मामले की कड़ियां जोड़ रही जांच एजेंसी ने बताया कि मानेसर स्थित ‘आइसीएन इंडिया’ नाम की कंपनी को परीक्षा के सवाल तैयार करने, उन्हें छापने और OMR शीट बनाने की सबसे गोपनीय जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस कंपनी में समीर कुमार नाम का शख्स काम करता था। प्रेस और प्रश्नों की सीधी पहुंच के कारण समीर को सारे सवाल और उनके सटीक जवाब पहले ही पता चल गए थे।
उसने परीक्षा से ठीक पहले पूरे प्रश्नपत्र और उसके उत्तरों को कंठस्थ कर लिया। इसके बाद वह महज एक कर्मचारी न रहकर नकल गिरोह का सबसे ताकतवर मोहरा बन गया। उसने इस गोपनीय जानकारी का सौदा पेपर लीक सिंडिकेट के साथ कर डाला।
दिल्ली से रांची का हवाई टिकट और सिंडिकेट का खर्च
जांच में यह बात भी साफ हुई है कि परीक्षा के दौरान समीर और उसके साथियों को दिल्ली से रांची लाने-ले जाने का पूरा इंतजाम योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। इन सभी की हवाई यात्रा और रहने-खाने का सारा खर्च सह-आरोपी सोमांश प्रकाश ने उठाया था। सीआईडी अब इस हवाई सफर और प्रश्नपत्र चोरी के पूरे नेटवर्क के बीच के तारों को बारीकी से खंगाल रही है।
लेन-देन की कड़ियां और कोचिंग संस्थानों की भूमिका
सीआईडी की जांच केवल पेपर रटने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब उन पैसों की तलाश की जा रही है जो इस फर्जीवाड़े में बहे थे। इस जांच के दायरे में रांची के दो बड़े कोचिंग संस्थान ‘पतंजलि आईएएस एकेडमी’ और ‘शिवांगन की पाठशाला’आ चुके हैं। आरोप है कि इन सेंटरों में अभ्यर्थियों को तय रकम लेकर पास कराने का ठेका लिया जाता था।
मामले में पतंजलि आईएएस के संचालक रवि कुमार और शिवांगन की पाठशाला के संचालक संजीत कुमार की गिरफ्तारी हो चुकी है और वे फिलहाल जेल में हैं। सीआईडी अब इनके बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन, ऑडिट रिपोर्ट और परीक्षा कराने वाली अन्य एजेंसियों टीडीपीएल व बिंसिस टेक्नोलॉजी के साथ इनके सीधे संबंधों की पड़ताल कर रही है।
यूपीआई से खातों में रकम ट्रांसफर, बेनकाब हुआ फर्जीवाड़ा
वित्तीय जांच के दौरान पुलिस को समीर के बैंक खाते में कई संदिग्ध लेन-देन मिले हैं। उसके खाते में यूटीआई के जरिए 98,000 और 30,000 रुपये के संदिग्ध ट्रांसफर का पता चला है। प्रिंटिंग प्रेस की पहुंच का गलत फायदा उठाकर परीक्षा पास करने और नौकरी हथियाने वाला समीर अब कानून के शिकंजे में है। सीआडी पैसे की हर एक कड़ी और गिरोह के बाकी सदस्यों का खाका तैयार कर जांच को अंतिम रूप देने में लगी है।

