सेंट्रल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद के इवेंट में किए गए कॉमेंट को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। 17 दिसंबर को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने उस ऑब्जेक्शनल कॉमेंट को लेकर मीटिंग के लिए बुलाया था। इस मीटिंग में पांच जजों की बेंच ने जस्टिस शेखर से सवाल-जवाब पूछे।
जस्टिस शेखर ने मीडिया पर लगाया आरोप
पांच जजों की बेंच के समक्ष अपनी सफाई देते हुए जस्टिस शेखर ने कहा कि यह मीडिया का फैलाया हुआ भ्रम है। मीडिया ने मेरे बयानों को गलत तरीके से पेश किया और उसका अर्थ बदल दिया है। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जस्टिस शेखर को फटकार लगाई और उन्हें कहा गया कि आपका हर बयान आपके पद की मर्यादा के अनुरूप होना चाहिए, ताकि लोगों का न्यायपालिका में विश्वास बना रहे।
कुछ भी बोलने से पहले न केवल अपने पद का ख्याल रखना चाहिए- हाईकोर्ट
आगे शीर्ष अदालत की ओर से कहा गया कि हाई कोर्ट के जज को कोर्ट के रूम के भीतर या बाहर कुछ भी बोलने से पहले न केवल अपने पद का ख्याल रखना चाहिए बल्कि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि लोगों का विश्वास न्यायपालिका पर बना रहे। जजों ने यह भी कहा कि जब आप सार्वजनिक जगहों पर बयान देते है, तो वो आपके व्यक्तिगत विचार नहीं रह जाते है। खबर है कि जस्टिस शेखर को अगली पेशी में भी बुलाया जा सकता है।
बता दें कि पांच जजों की बेंच में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना के अलावा जस्टिस भूषण रामाकृष्णा गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऋषिकेश रॉय औऱ जस्टिस ए एस ओका शामिल थे।
गौरतलब है कि मामला प्रकाश में आने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नया रोस्टर जारी किया है, जो कि 16 दिसंबर से लागू है। इसमें जस्टिस शेखर के कामकाज को सीमित कर दिया गया है। जस्टिस शेखर यादव अब केवल निचली अदालत के फैसलों के खिलाफ दायर की गई प्रथम अपीलों की ही सुनवाई कर सकेंगे। इनमें भी वे सशर्त उन्हीं अपील की सुनवाई करेंगे जो 2010 के पहले दायर की गई होँ।
इतना ही नहीं इस बयानबाजी के चक्कर में जस्टिस शेखर पर विपक्षी दलों ने महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जिसके लिए कपिल सिब्बल के नेतृत्व में 55 सांसदों ने हस्ताक्षर किए है। इस पर भी राज्यसभा में चर्चा होनी है।

