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चीन के समर्थक हैं मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज, जानें भारत पर क्या पड़ेगा इसका प्रभाव

by Rakesh Pandey
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नई दिल्ली : बीते शनिवार मालदीव में राष्ट्रपति चुनाव 2023 के परिणाम जारी किए गए। मालदीव के स्थानीय मीडिया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 53% मत हासिल कर मोहम्मद मुइज मालदीव के नए राष्ट्रपति के रूप चुने गए। यह चुनाव दो चरणों में पूरा हुआ, जिसमें पहला चरण 9 सितम्बर 2023 तथा दूसरा चरण 30 सितंबर 2023 को संपन्न हुआ।

मुइज की 18 हजार वोटों से हुई जीत :

मीडिया के मुताबिक पहले चरण में मुइज और सोलिह दोनों में से किसी को 50 फीसदी से ज्यादा वोट नहीं मिल पाए थे मगर दूसरे चरण में मौजूदा राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को 46 % वोट मिला व मोहम्मद मुइज ने 18,000 से अधिक वोटो से जीत हासिल की है। मौजूदा राष्ट्रपति सोलिह पश्चिम और मानवाधिकार समर्थक मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी से है व मुइज पीपुल्स नेशनल कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ रहे थे।

जीत के बाद क्या कहा मुइज़ ने

मीडिया से बातचीत में मुइज ने कहा कि वह मालदीव की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे । उन्होंन ये भी कहा कि यह जीत उनको तब मिली जब हमलोगो को आपसी मतभेद को भूल कर एक शांतिपूर्ण सामाज बनाने कि जरूरत है।

मुइज ने अपने बयान मे थे भी कहा कि पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को जेल की जगह हाउस अरेस्ट में रखा जाए।

कौन हैं अब्दुल्ला यामीन

अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम पूर्व राष्ट्रपति हैं। वह मालदीव के छठे राष्ट्रपति रह चुके है। 17 नवम्बर 2013 को उन्होंने इस पद की शपथ ग्रहण की। उनकी वर्तमान आयु 64 वर्ष हैं।
वह प्रोग्रेसिभ पार्टी अफ मालदीव से संबंध रखते हैं। वह साल 2013 से 2018 तक राष्ट्रपति रहें, जिसके बाद उन्हे धन शोषण के एक मामले में दोषी पाए जाने पर 11 साल की सजा सुनाई गई। भारत के विरोधी और चीन के समर्थक माने जाते हैं मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन। मालदीव की एक कोर्ट ने अब्दुल्ला यामीन को यह सजा धन शोधन और भ्रष्टाचार का दोषी ठहराने पर सुनाई।इसके साथ ही कोर्ट ने यामीन पर 50 लाख डॉलर का जुर्माना भी लगाया।

 

कौन हैं मोहम्मद मुइज

पेशे से मालदीव के नए राष्ट्रपति सिविल इंजीनियर रह चुके हैं, उनकी उम्र 45 वर्ष हैं। साथ ही वह माले शहर के मेयर भी रह चुके हैं। वह चीनी नीतियों के प्रबल समर्थक हैं। अपने चुनाव प्रचार के उन्होंने ये प्रस्ताव रखा था कि यदि वह राष्ट्रपति बने तो मालदीव में चीनी निवेश में बढ़ोतरी करने का प्रयास करेंगे। खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में चीन और करीब आएगा। राष्ट्रपति चुनाव से कुछ वक्त पहले ही मूइज चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के नेताओं से मिले थे और कहा था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने पर जोर देंगे।

भारत समर्थक थे पूर्व राष्ट्रपति

विदित हो कि इसके पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह भारत समर्थक थे, वहीं नए राष्ट्रपति चीनी विचारधारों के समर्थक हैं।

निवर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह को भारत के साथ मजबूत रिश्तों के समर्थक के तौर पर देखा जाता रहा है।

61 वर्षीय इब्राहिम साल 2018 में मोहम्मद यामिन के बाद सत्ता में आए। मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े इब्राहिम सोलिह ने अपने कार्यकाल के दौरान ‘इंडिया फ़र्स्ट’ यानी भारत को प्राथमिकता देने की नीति लागू की।

मालदीव के भारत के साथ पहले से ही सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं।

मालदीव लंबे समय से भारत के प्रभाव में रहा है. ये माना जाता है कि मालदीव में अपनी मौजूदगी बनाये रखकर भारत हिंद महासागर के बड़े हिस्से पर निगरानी रखता रहा है. लंबे समय से भारत मालदीव के अच्छे संबंधों के मद्देनजर मालदीव भारतीयों के लिए एक अच्छा टूरिज्म स्पॉट भी रहा हैं। जो कहीं ना कहीं देश की अर्थव्यवस्था का आधार होता है और मजबूती देता है। मगर चीनी समर्थक राष्ट्रपति के चुनाव से भारत और मालदीव के रिश्तों पर क्या असर पड़ता हैं, यह एक व्यापक मुद्दा हैं।

भारत पर क्या हो सकता है प्रभाव?

मालदीव में हुआ राष्ट्रपति चुनाव से भारत में असर पड़ सकता है क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोहिल को भारत का समर्थक माना जता था वहीं मोहम्मद मुइज चीनी समर्थक है।
मुइज ने वादा किया था कि अगर वह जीतेंगे तो मालदीव से भारतीय सैनिकों को हटा देंगे और देश के व्यापार संबंध को संतुलित करेंगे ।

मालदीव के राजनेताओं का एक पक्ष को भारत की मौजूदगी खलती है। मुइज को भारत पर गहरा संदेह है।
ऐसा माना जा रहा है कि मुइज पूर्व राष्ट्रपति यामीन के ‘ इंडिया आउट ‘ कैंपेन को एक नई दिशा देंगे। मालदीव का राष्ट्रीय रक्षा बल (एमएनडीएफ) बीजिंग के साथ रक्षा समझौते पर काम करने के लिए उत्सुक है। भारत को अपनी मौजूदगी मालदीव में खोनी पड़ सकती है।

 

क्या इण्डिया आउट कैंपेन होगा सक्रिय

बता दें, इससे पूर्व 2013 से 2018 तक राष्ट्रपति रहे मोहम्मद यामिन भारत विरोधी थे। और मुइज भी उसी विचाधारा के समर्थक हैं। इसलिए अपने चुनाव प्रचार के दौरान मुइज ने कई बार इण्डिया आउट कैंपेन का जिक्र किया जिसका उद्देश्य
उद्देश्य मालदीव में भारत के निवेश, दोनों के बीच रक्षा साझेदारी और भारत के नेट-सुरक्षा प्रावधानों के प्रति संदेह पैदा करके और अधिक नफरत को बढ़ावा देना है।

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इसी के साथ मुइज ने भारत की जगह चीनी निवेशकों को बढ़ावा देने की बात कहीं हैं। ऐसे में यह एक रोचक विषय हैं कि क्या चीन मालदीव के साथ सच में अच्छे संबंध स्थापित करना चाहता हैं या उसका लक्ष्य महज मालदीव पर निवेश कर उन्हे श्री लंका और पाकिस्तान जैसी स्थिति में लाकर खड़ा करना हैं।

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