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Chaibasa News: डीप बोरिंग व जलमीनार निर्माण का भुगतान नहीं मिलने से संवेदक आर्थिक संकट में, विभागीय कार्यशैली पर उठे सवाल

by Rajeshwar Pandey
Manoharpur Drinking Water Project Payment Delay
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चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग अवर प्रमंडल मनोहरपुर के अंतर्गत विभिन्न पंचायतों और गांवों में डीप बोरिंग कर जलमीनार स्थापित करने वाले संवेदक मुकेश अग्रवाल को अब तक विभाग की ओर से भुगतान नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। कार्य पूर्ण होने और कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने के बावजूद भुगतान लंबित रहने से संवेदक आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

यहां कराया गया है डीप बोरिंग का काम

जानकारी के अनुसार संवेदक द्वारा प्राथमिक विद्यालय कोलबोंगा, प्राथमिक विद्यालय समठा, उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बलिबा, गुंडीजोरा मैदान के निकट, डोलाईगढ़ा मैदान के निकट, प्राथमिक विद्यालय उसुरुईया, नंदपुर पंचायत के पत्थरवासा टोला स्थित मुंडा टोला स्कूल, दीघा पंचायत के हिन्दकुली टोला खास नया कैम्प, मकरण्डा पंचायत के हेदलबेड़ा टोला खास नया कैम्प, दीघा पंचायत के हाथी टावर टोला खास नया कैम्प, चिड़िया के अंकुवा गांव के तोरपा टोला तथा गंगदा पंचायत के टिमरा गांव के गुम्फुआ टोला समेत कई स्थानों पर डीप बोरिंग एवं जलमीनार निर्माण का कार्य कराया गया है।

कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी भुगतान नहीं

बताया जाता है कि इन सभी योजनाओं का कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा कर विभाग को सौंप दिया गया है।संवेदक को कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र भी प्राप्त हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद विभाग की ओर से अब तक भुगतान नहीं किया गया है। भुगतान लंबित रहने के कारण संवेदक को मजदूरी, सामग्री आपूर्ति तथा अन्य वित्तीय दायित्वों के निर्वहन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संवेदक का कहना है कि विभागीय स्तर पर बार-बार संपर्क करने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। इससे न केवल संवेदक बल्कि कार्य से जुड़े अन्य लोगों के समक्ष भी आर्थिक परेशानी उत्पन्न हो गई है।

गौरतलब है कि क्षेत्र के अन्य स्थानों पर भी डीप बोरिंग और जलमीनार निर्माण का कार्य कराया गया है, जिनके भुगतान को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। संवेदक ने विभागीय अधिकारियों से जल्द भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि पेयजल योजनाओं के कार्यान्वयन में लगे लोगों को राहत मिल सके। इधर पेयजल और स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता जितेंद्र कुजूर ने कहा कि जो लिखना है लिखिए , फंड नहीं है तो कहां से दें। जब आएगा तो दिया जाएगा।

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