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MGNREGA : मनरेगा कर्मियों के 103 दिनों की हड़ताल का मानदेय अधर में, ‘नो वर्क-नो पे’ पर अब भी फैसला बाकी

by Nikhil Kumar
MGNREGA work continues without disruption in Jharkhand and other states.
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कई मांगों पर बनी सहमति, लेकिन हड़ताल अवधि के भुगतान पर नहीं निकला समाधान

रांची: अपनी लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर 12 मार्च से 19 जून 2026 तक लगातार 103 दिनों की हड़ताल पर रहे झारखंड के मनरेगा कर्मियों की हड़ताल अवधि के मानदेय पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार और झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के बीच हुई वार्ता में अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई थी, लेकिन 103 दिनों की हड़ताल अवधि के मानदेय के भुगतान का मुद्दा अनिर्णीत रह गया। यही कारण है कि हड़ताल समाप्त होने के बाद भी कर्मियों को उक्त अवधि का मानदेय नहीं मिल सका है। हड़ताल के दौरान ग्रामीण विकास विभाग ने ‘नो वर्क, नो पे’ का सिद्धांत लागू कर दिया था। विभाग द्वारा कई बार कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील भी की गई थी, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में सरकार के साथ वार्ता के बाद 20 जून को हड़ताल समाप्त हुई और सभी कर्मी काम पर लौट आए।

ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सामान्य सरकारी कर्मचारियों के मामले में यदि कोई कर्मचारी अवकाश पर रहता है तो नियमानुसार उसकी अवधि का समायोजन अर्जित अवकाश (ईएल) से किया जा सकता है। लेकिन यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक हड़ताल पर रहता है तो इतनी लंबी अवधि का ईएल से समायोजन भी संभव नहीं होता। मनरेगा कर्मियों के सेवा नियमों में 16 दिन की ईएल और सीएल अवकाश की व्यवस्था है। ऐसे में 103 दिनों की हड़ताल अवधि का समायोजन करना नियमों के अनुरूप आसान नहीं है। हालांकि, सरकार ने इस मामले में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

सरकार और कर्मचारी संघ के बीच हुई वार्ता में 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके क्षेत्रीय कर्मियों को ग्रेड-पे का लाभ देने की प्रक्रिया शुरू करने, सेवाकाल के दौरान दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को नियुक्ति में प्राथमिकता देने, सभी मनरेगा कर्मियों को मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जोड़ने तथा अन्य सेवा संबंधी मांगों पर चरणबद्ध कार्रवाई पर सहमति बनी थी। इन आश्वासनों के बाद कर्मचारी संघ ने 103 दिनों से जारी हड़ताल समाप्त कर दी थी।

हालांकि, हड़ताल अवधि के मानदेय पर कोई सहमति नहीं बन सकी। मनरेगा कर्मचारी संगठन का कहना है कि आंदोलन कर्मचारियों के हितों और सेवा सुरक्षा से जुड़ा था। इसलिए सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए हड़ताल अवधि का समायोजन कर लंबित मानदेय का भुगतान करना चाहिए। दूसरी ओर, विभागीय स्तर पर इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में 103 दिनों के मानदेय का मामला फिलहाल सरकार के फैसले पर टिका हुआ है।

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