Adityapur (Jharkhand) : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर (NIT Jamshedpur) के 15वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 29 दिसंबर 2025 को आयोजित इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। उनके प्रस्तावित आगमन को देखते हुए मंगलवार को वाणिज्य कर विभाग के सचिव अमिताभ कौशल और रांची के जोनल आईजी मनोज कौशिक ने संयुक्त रूप से एनआईटी परिसर का दौरा किया। इस दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने यहां तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने विशेष रूप से एनआईटी ग्राउंड में तैयार मुख्य पंडाल और कार्यक्रम स्थल का जायजा लिया।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आईजी ने कड़े निर्देश
सुरक्षा व्यवस्था पर जोर देते हुए आईजी मनोज कौशिक ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए, ताकि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान सुरक्षा में कोई कोताही न रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने तैयारियों पर संतोष जताया, हालांकि उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी और कोई औपचारिक बयान नहीं दिया। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) और सरायकेला-खरसावां जिले के उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक तथा प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के आगमन पर जिला प्रशासन ने उनकी अगवानी की।
29 दिसंबर को आएंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड में 29 दिसंबर को दो प्रमुख कार्यक्रम निर्धारित हैं। एनआईटी के दीक्षांत समारोह से पहले सुबह वे जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेर परिसर पहुंचेंगी, जहां संथाली लिपि ‘ओल चिकी’ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सप्ताह भर के सेमिनार के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी तथा संबोधित करेंगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भी आने की संभावना, एक हजार से अधिक छात्रों को मिलेगी डिग्री
इस दौरान लगभग 1000 से अधिक छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी तथा टॉपर छात्राओं को गोल्ड मेडल दिए जाएंगे। कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई केंद्रीय मंत्री और गणमान्य व्यक्ति शामिल होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, जिसमें रूट पर अतिक्रमण हटाने से लेकर नो-फ्लाई जोन घोषित करने तक के कदम शामिल हैं। यह दौरा आदिवासी संस्कृति और तकनीकी शिक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

