
धनबाद : वासेपुर एक बार फिर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के निशाने पर है। कभी स्थानीय स्तर पर रंगदारी और दहशत का पर्याय बना कुख्यात भगोड़ा गैंगस्टर प्रिंस खान अब सिर्फ धनबाद पुलिस की चिंता नहीं रहा। उसके काले कारनामों के तार सीमा पार पाकिस्तान और खाड़ी देशों तक जुड़ते दिख रहे हैं। इसी पाकिस्तान कनेक्शन और आतंकी नेटवर्क की गुत्थी सुलझाने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने मोर्चा संभाल लिया है और जांच का दायरा झारखंड से लेकर विदेश तक फैला दिया है।
धनबाद पहुंच एनआईए जुटा रही क्राइम फाइल
प्रिंस खान के गिरोह पर पूरी तरह शिकंजा कसने के लिए एनआईए की एक विशेष टीम धनबाद पहुंची। टीम ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ घंटों बैठक की और प्रिंस खान के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों की बारीकी से समीक्षा की। एजेंसी यह पता लगा रही है कि उसके खिलाफ कितने मामले दर्ज हैं, किन-किन केसों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और कहां जांच अभी पेंडिंग है।
मामले की पुष्टि करते हुए धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि भगोड़े प्रिंस खान से जुड़े मुकदमों और उसके स्थानीय संपर्कों की पूरी जानकारी एनआईए की टीम के साथ साझा की जा रही है।
दुबई में ठिकाना और पाकिस्तान से संपर्क!
सुरक्षा एजेंसियों को लंबे समय से संदेह है कि प्रिंस खान भारत से भागकर संभवतः दुबई में छिपा हुआ है और वहीं से इंटरनेट कॉलिंग के जरिए धनबाद के व्यापारियों से रंगदारी वसूल रहा है। लेकिन अब कहानी में सबसे बड़ा मोड़ पाकिस्तान कनेक्शन का आया है। एनआईए इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि विदेश में बैठे किन-किन संदिग्धों के जरिए प्रिंस खान का संपर्क पाकिस्तान के आतंकी तत्वों या उनके सहयोगियों से हुआ।
एजेंसी का पूरा ध्यान इस बात पर है कि प्रिंस खान सिर्फ एक क्रिमिनल नेटवर्क चला रहा है या फिर वह देश विरोधी ताकतों और आतंकी संगठनों के लिए फंडिंग या लॉजिस्टिक्स का जरिया बन चुका है। अगर एनआईए को प्रिंस खान के खिलाफ आतंकी संगठनों से सांठगांठ, हथियार तस्करी या देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।
जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर केंद्र सरकार उसे आधिकारिक तौर पर आतंकी घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकती है। फिलहाल, एनआईए हर छोटे-बड़े सुराग को वैज्ञानिक और तकनीकी स्तर पर परख रही है।

