
रांची: युवा केवल करियर और व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का भी निर्वहन करें। वर्तमान समय में देश की एकता और अखंडता को प्रभावित करने वाले अनेक वैचारिक भ्रम और चुनौतियों सामने हैं। ऐसे समय में युवाओं को सजग,जागरूक और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित होकर कार्य करना चाहिए।
यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य वी.भगय्या ने कहीं। वे रांची महानगर (विक्रमादित्य नगर) की ओर से सरला बिरला विश्वविद्यालय के सभागार में शुक्रवार को आयोजित ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम में युवाओं को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज में संगठन, समरसता और राष्ट्रभाव जागृत करना ही आरएसएस का उद्धेश्य है।
उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में चल रहे जनसंपर्क अभियान तथा संघ की मूल विचारधारा पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डॉ. हेडगेवार के जीवन-संघर्ष की दी जानकारी
संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन-संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने और अत्यंत अभावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। नौवीं कक्षा में वंदे मातरम् आंदोलन से जुड़ने के कारण उन्हें विद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। कलकत्ता से एमबीबीएस की शिक्षा प्रथम श्रेणी में पूर्ण करने के बाद भी उन्होंने बर्मा में उच्च सरकारी पद का प्रस्ताव अस्वीकार कर अपना संपूर्ण जीवन स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने गंभीर चिंतन किया कि मुगलों और अंग्रेजों जैसे विदेशी आक्रमणकारी भारत पर शासन करने में सफल क्यों हुए। उनके अनुसार, अपनी राष्ट्रीय अस्मिता का विस्मरण, समाज का असंगठित होना तथा आंतरिक विषमताएं ही इसकी प्रमुख कमजोरी थीं। इन्हीं कमियों को दूर कर समाज में संगठन, समरसता और राष्ट्रभाव जागृत करने के उद्देश्य से वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई।
हमारी बड़ी पहचान- सभी भारत मां की संतान
उन्होंने कहा कि भारत में भाषाओं, खान-पान, वेशभूषा और पूजा-पद्धतियों की विविधता हमारी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है, किंतु हमारी सबसे बड़ी और मूल पहचान यह है कि हम सभी भारत माता की संतान हैं। विदेशी शासन के दौरान समाज को जाति, क्षेत्र, भाषा तथा अन्य आधारों पर विभाजित करने के सुनियोजित प्रयास किए गए। ऐसे विभाजनों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और संगठन की भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह का सपना केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था,बल्कि ऐसे भारत का निर्माण करना था जहां प्रत्येक नागरिक को समान सम्मान मिले, श्रम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त हो तथा किसी भी आधार पर किसी का शोषण न हो।
कार्यक्रम में टाटीसिलवे एवं आसपास के क्षेत्रों से एक हजार से अधिक युवा विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, अधिवक्ताओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों तथा व्यवसायियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम में विक्रमादित्य नगर के संघचालक शंकर साहू, सह संघचालक ब्रजेश सहित नगर के सभी दायित्ववान कार्यकर्ता एवं अधिकारी उपस्थित थे।

