
रांची: झारखंड में 71 प्रतिशत युवा नौकरी की तलाश में हैं। जबकि 15 प्रतिशत पढ़ाई कर रहे हैं। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण राज्य से पलायन बढ़ रहा है। शिक्षित एवं योग्य युवाओं को भी कम वेतन और अस्थायी कार्य करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। इसका खुलासा एक सर्वेक्षण से हुआ है। सर्वेक्षण की रिपोर्ट शुक्रवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में जारी की गई।
ज्ञान विज्ञान समिति,झारखंड ने राज्य के 18 जिलों में बेरोजगारी सर्वेक्षण कराया। इसमें राज्य में रोजगार की स्थिति को लेकर जो आंकड़े आए वह चिंताजनक है। अगस्त–सितंबर 2025 के दौरान 4,678 युवाओं पर किए गए सर्वेक्षण में 71 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि वे रोजगार की तलाश में हैं,जबकि 15 प्रतिशत पढ़ाई कर रहे हैं। शेष लोग खेती, अनियमित मजदूरी या छोटे-मोटे स्वरोजगार से जुड़े हैं।
समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ काशीनाथ चटर्जी ने बताया कि सर्वेक्षण में 2,735 पुरुष और 1,943 महिलाएं शामिल थीं। इनमें 96 प्रतिशत शिक्षित होने के बावजूद अधिकांश युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार 49 प्रतिशत लोगों को अच्छे रोजगार की संभावना बेहद कम दिखती है,जबकि 21 प्रतिशत ने रोजगार मिलने की संभावना लगभग समाप्त होने की बात कही। वहीं,95 प्रतिशत से अधिक युवाओं का मानना है कि समय के साथ राज्य में बेरोजगारी की स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
झारखंड से बढ़ रहा पलायन
डॉ चटर्जी ने कहा कि रोजगार के सीमित अवसरों के कारण झारखंड से पलायन बढ़ रहा है। उन्होंने कृषि, कृषि आधारित उद्योग, कुटीर उद्योग और स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाने, सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति करने तथा गिग वर्करों को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की।
समिति ने कहा कि सर्वेक्षण के आधार पर राज्य सरकार को रोजगार सृजन संबंधी विस्तृत नीति-परामर्श सौंपा जाएगा और राज्यव्यापी जनसंवाद अभियान चलाया जाएगा।
प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रवि सिंह,राज्य अध्यक्ष शिव शंकर, राज्य उपाध्यक्ष हेमंत जायसवाल,राज्य महासचिव विश्वनाथ सिंह,राज्य कोषाध्यक्ष सुरेंद्र ठाकुर और धनबाद जिला सचिव भोलाराम भी मौजूद थे।
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