
जमशेदपुर : साहित्य कला फाउंडेशन की ओर से आयोजित दो दिवसीय साहित्यिक महाकुंभ छाप 3.0 का भव्य आरंभ शुक्रवार को हो गया। बिष्टुपुर स्थित होटल एल्कोर में सुबह से शाम तक चले आयोजन में किताबों व एआई की प्रासंगिकता पर तो बातें हुईं ही, किताबों के बहाने समाज व सांसारिक दुनिया पर भी काफी चर्चा हुई।
झारखंड के पूर्व सूचना आयुक्त बैजनाथ मिश्रा की अध्यक्षता में हुए उद्घाटन सत्र में एआई के दौर में किताबों का भविषय विषयक परिचर्चा में मुख्य अतिथि कोच्चि (केरलम) से आईं प्रो. के. वनजा ने कहा कि कोई भी तकनीक लेखक का अस्तित्व समाप्त नहीं कर सकती। हमें इससे कतई डरने की जरूरत नहीं है। किताबों के स्पर्श व गंध से हम विशेष दुनिया में पहुंच जाते हैं, वह अनुभूति एआई या डिजिटल स्क्रीन कभी नहीं दे सकती। आलोचक राकेश बिहारी ने कहा कि एआई ने लोगों को शक्की बना दिया है। इससे अपने लिखे पर भी लोगों को शक होने लगा है। हालांकि हम जिस तरह जीते हैं, वह एआई कभी महसूस नहीं करा सकता। कथाकार पंकज मित्र ने कहा कि मानव इतिहास में पहली बार ऐसी तकनीक आई है, जिसने मानव मस्तिष्क को चुरा लिया है। अंत में अध्यक्षीय वक्तव्य में बैजनाथ मिश्रा ने कहा कि एआई जेनरेटर है, जबकि मनुष्य क्रिएटर है। एआई हमें वहीं देता या लौटाता है, जो मनुष्य पहले दे चुका है।
आयोजन की अगली कड़ी में दर्शक तब रोमांचित हो गए, जब उन्होंने जमशेदपुर के रविराज मुर्मू द्वारा निर्देशित संताली लघु फिल्म आंगेन देखी। यह फिल्म राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी है। फिल्म के बाद निर्देशक ने इसके निर्माण से संबंधित बातें बताईं, तो मॉडरेटर की भूमिका में डॉ. विजय शर्मा ने भी अपने उद्बोधन में फिल्म पर अपने विचार रखे। इससे पहले डॉ. विजय शर्मा की पुस्तक नोबेल साहित्य व सिनेमा के प्रथम संस्करण का विमोचन हुआ। इसी क्रम में पद्मश्री दमयंती बेसरा व साहित्यकार निर्मला पुतुल से मॉडरेटर भादो माझी ने आदिवासी साहित्य में स्त्री की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की।
इसी बीच लेखक-सह-भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी प्रशांत आनंद से मुन्ना कुमार पांडेय ने पुस्तक राजकौशल पर चर्चा की। इस पुस्तक में 19 भारतीय राजाओं की कहानी है।
इसी कड़ी में एआई युग में खबरें : विश्वसनीयता का संकट पर हिंदुस्तान के संपादक गणेश मेहता, दैनिक भास्कर के संपादक कुमार भवानंद, दैनिक जागरण के संपादक प्रदीप सिंह, चमकता आईना के संपादक जयप्रकाश राय से मॉडरेटर की भूमिका में उदितवाणी के संपादक उदित अग्रवाल ने सारगर्भित संवाद किया। फिर, लेखक-फिल्मकार विमलचंद्र पांडेय से उनकी पुस्तक गुलअब्बास के रचनाकर्म व मर्म पर रश्मि शर्मा ने चर्चा की।
इसके बहाने उपन्यास की कई विशेषताओं से दर्शक-श्रोता रूबरू हुए। यात्रा-गल्प- बेहयाई के 72 दिन के लेखक प्रमोद सिंह से अविनाश सिंह ने चर्चा की। प्रथम दिवस का अंतिम कार्यक्रम हिमांशु बाजपेई की किस्सागोई रही, जिसमें काकोरी कांड की कहानी ने सबको सम्मोहित कर दिया। शहादत के किस्सों से हॉल में मौजूद हर आंखें नम हो गईं।

