
रांची : बहुचर्चित डीआईजी प्रियदर्शी आलोक व पत्रकार सैयद शारीफ इब्राहिम के बीच का विवाद अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। प्रशासनिक महकमें से लगातार गुहार के बावजूद बंधक बने रहने को मजबूर पत्रकार सैयद शारीफ इब्राहिम ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इनकी ओर से क्रिमिनल रिट याचिका दायर की गई है। जिसमें, अपने और अपने परिवार के लिए आवागमन का रास्ता बहाल कराने, उनके गेट पर ईंट-पत्थर लगाकर किए गए अवरोध हटाने व सुरक्षा उपलब्ध कराने व पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
सैयद शरीफ इब्राहिम की ओर से दायर क्रिमिनल रिट याचिका में झारखंड सरकार, रांची के उपायुक्त, एसडीएम सदर, अरगोड़ा थाना प्रभारी व वर्तमान में डीआईजी रेल के पद पर पदस्थापित आईपीएस प्रियदर्शी आलोक को प्रतिवादी बनाया गया है। केस की पैरवी अधिवक्ता सौरभ दास और फहीम अख्तर कर रहे हैं।
याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता पत्रकार सैयद शारीफ का परिवार वर्ष 1963 से ही अशोक नगर रोड नंबर-1 की 40 फीट चौड़ी सड़क से आवागमन करता आया है। याचिका में यह भी बताया गया है कि वर्ष 1991 में आरआरडीए द्वारा स्वीकृत भवन नक्शे में भी आवासीय परिसर तक पहुंचने के लिए अशोक नगर रोड नंबर-1 की 40 फीट चौड़ी सड़क से होकर उनके निजी परिसर का 12 फीट का रास्ता दर्शाया गया है। वर्तमान में याचिकाकर्ता के आवासीय परिसर में करीब छह परिवार पांच अलग-अलग मकानों में रहते हैं और ये सभी परिवार इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। जिसे रेल डीआईजी के पद पर पदस्थापित आईपीएस प्रियदर्शी आलोक ने गैरकानूनी ढंग से रोक दिया है।
एसडीएम के नोटिस के बाद रात के अंधेरे में गेट पर ईट-पत्थर रखने का आरोप
याचिका में कहा गया है कि मामले में उपायुक्त रांची और एसडीएम सदर रांची के समक्ष शिकायत के बाद संबंधित अंचल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच में रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम कोर्ट में कार्यवाही शुरू की गई। इसकी नोटिस देने के बाद बावजूद 3 और 4 अक्टूबर 2026 की देर रात अंधेरे मे उनकी गेट के सामने ईंट और पत्थर के बड़े टुकड़े रख दिए गए। इससे संबंधित तस्वीरें भी प्रस्तुत की गई है।
आपातकालीन सेवाओं को लेकर भी चिंता
याचिका में कहा गया है कि रास्ता बाधित होने से केवल सामान्य आवागमन ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहन जैसे आपातकालीन वाहनों के पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि उनका विवाद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ है, इसलिए स्थानीय पुलिस-प्रशासन द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है।
29 सितंबर को सरकारी वाहन खड़ा करने का आरोप
याचिका के अनुसार, 29 सितंबर 2026 की शाम करीब 6 बजे डीआईजी के पद पर पदस्थापित आईपीएस प्रियदर्शी आलोक द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सरकारी स्कॉर्पियो वाहन को कथित तौर पर याचिकाकर्ता के आवासीय गेट के सामने खड़ा कर दिया गया। इससे पूरा परिवार बंधक बने रहने को मजबूर हो गया है। याचिकाकर्ता ने वाहन हटाने का अनुरोध किया, तब कथित रूप से संबंधित अधिकारी अपने बॉडीगार्ड के साथ वहां पहुंचे और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
एके-47 से गोली चलाने की धमकी का आरोप
याचिका में एक गंभीर आरोप यह भी लगाया गया है कि याचिकाकर्ता को एके-47 से गोली चलाने की धमकी दी गई। आरोप के अनुसार, यदि कोई वाहन वहां खड़े वाहन के पास आया तो गोली चलाने की बात कही गई। साथ ही झूठे आपराधिक मामले में फंसाने और उनका जीवन बर्बाद करने की धमकी भी दी गई। घटना के बाद उन्होंने 29 सितंबर 2026 को अरगोड़ा थाना में लिखित शिकायत दी। शिकायत में रास्ता रोकने, धमकी, कथित रूप से हथियारबंद बॉडीगार्ड की मौजूदगी और गोली चलाने की धमकी सहित अन्य आरोप लगाए गए।
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