Home » Howrah Railway Station : कोलकाता में छूट रही थी दूल्हे की ट्रेन, रेलवे बना डाला स्पेशल कॉरिडोर

Howrah Railway Station : कोलकाता में छूट रही थी दूल्हे की ट्रेन, रेलवे बना डाला स्पेशल कॉरिडोर

रेलवे अधिकारियों द्वारा विशेष कॉरिडोर बनाने का उद्देश्य था दूल्हे और उनके परिवार को जल्दी से जल्दी प्लेटफॉर्म नंबर 9 ओल्ड कॉम्प्लेक्स तक पहुंचाना, ताकि वे अपनी अगली ट्रेन सरायघाट एक्सप्रेस पकड़ सकें।

by Rakesh Pandey
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

हावड़ा: हावड़ा रेलवे स्टेशन पर एक दिलचस्प और दिल को छूने वाली घटना घटी, जिसने भारतीय रेलवे की तत्परता और संवेदनशीलता को उजागर किया। मुंबई से गुवाहाटी जा रहे एक दूल्हे और उनके परिवार के सामने अचानक एक ऐसी समस्या आ गई, जिसका समाधान रेलवे अधिकारियों की तत्परता और समझदारी से हुआ। यह घटना न केवल रेलवे कर्मचारियों की मेहनत का परिचायक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि रेलवे अपने यात्रियों की परेशानियों को गंभीरता से लेकर त्वरित समाधान करता है।

दूल्हे के लिए परेशानी का समय

मुंबई से गुवाहाटी की यात्रा कर रहे चंद्रशेखर बाघ और उनके परिवार के लिए सफर शुरू में सामान्य था, लेकिन जब उनकी ट्रेन हावड़ा स्टेशन से करीब 15 किलोमीटर दूर थी, तो दूल्हे को एहसास हुआ कि वह अपनी शादी में शामिल होने के लिए समय पर नहीं पहुंच पाएंगे। इस स्थिति में प्लेटफॉर्म बदलने की चुनौती और साथ में बुजुर्गों तथा बच्चों को ले जाने का कठिनाई भरा काम एक बड़ी समस्या बन गया। चंद्रशेखर बाघ और उनके परिवार को यह भय था कि वह अपनी शादी के समारोह में शामिल होने में शायद असफल हो जाएंगे।

रेलवे से मदद की गुहार

स्थिति के गंभीर होने के बाद, चंद्रशेखर बाघ ने हावड़ा रेलवे स्टेशन पर मौजूद मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) और वरिष्ठ डीसीएम से संपर्क किया। उन्होंने रेलवे अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई और बताया कि उनका परिवार शादी में शामिल होने के लिए समय पर गुवाहाटी नहीं पहुंच पाएगा। यह एक कठिन परिस्थिति थी, लेकिन रेलवे अधिकारियों ने तत्काल इस मामले पर ध्यान दिया और तत्परता से समाधान निकालने की कोशिश की।

रेलवे की तत्परता: विशेष कॉरिडोर का निर्माण

रेलवे अधिकारियों ने चंद्रशेखर बाघ की समस्याओं को समझते हुए हावड़ा स्टेशन पर तुरंत विशेष इंतजाम करने का निर्णय लिया। जैसे ही गीतांजलि एक्सप्रेस हावड़ा स्टेशन पर पहुंची, रेलवे कर्मचारियों ने तत्काल एक विशेष कॉरिडोर तैयार किया। इस विशेष कॉरिडोर का उद्देश्य था दूल्हे और उनके परिवार को जल्दी से जल्दी प्लेटफॉर्म नंबर 9 ओल्ड कॉम्प्लेक्स तक पहुंचाना, ताकि वे अपनी अगली ट्रेन सरायघाट एक्सप्रेस पकड़ सकें।

इसके लिए रेलवे ने चार बैटरी चालित कारों और व्हीलचेयर का इंतजाम किया ताकि दूल्हे और उनके परिवार के सदस्य, जिनमें कुछ बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी थे, बिना किसी परेशानी के प्लेटफॉर्म पर जल्दी से पहुंच सकें। इस विशेष इंतजाम से दूल्हे का परिवार बिना किसी देरी के अपनी अगली ट्रेन तक पहुंच सका।

12 कर्मचारियों की टीम ने की मदद

इस पूरे ऑपरेशन में 12 से अधिक रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ परिवार को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। रेलवे कर्मचारियों ने न सिर्फ दूल्हे के परिवार को उचित मार्गदर्शन दिया, बल्कि उनका उत्साह बढ़ाते हुए पूरी प्रक्रिया में उनका सहयोग किया।

दूल्हे की शादी में समय पर पहुंचने की खुशी

रेलवे की मदद और विशेष इंतजामों के कारण, दूल्हा और उसका परिवार समय पर गुवाहाटी पहुंचे और शादी समारोह में शिरकत कर पाए। जैसे ही परिवार समारोह स्थल पर पहुंचे, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यह उनके लिए एक बड़ी राहत थी, क्योंकि उन्हें अपनी शादी के दिन किसी और प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

समारोह के बाद, चंद्रशेखर बाघ ने ट्विटर पर रेल मंत्री और सभी रेलवे अधिकारियों तथा कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि रेलवे के संवेदनशील रवैये और तत्परता के कारण उनकी बड़ी समस्या का समाधान हो सका। रेलवे कर्मचारियों के समर्पण और तत्परता को सराहा गया, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ एक परिवार को समय पर शादी के समारोह में पहुंचने का मौका दिया, बल्कि रेलवे की सेवा और दक्षता को भी एक नया मानक स्थापित किया।

भारतीय रेलवे का सराहनीय कदम

यह घटना न केवल रेलवे के कर्मचारियों की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि रेलवे यात्रियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को कितनी गंभीरता से निभाता है। विशेष रूप से ऐसे आपातकालीन या अप्रत्याशित स्थितियों में रेलवे द्वारा किए गए त्वरित कदम एक मिसाल हैं। रेलवे की यह तत्परता और संवेदनशीलता दर्शाती है कि जब भी किसी यात्री को किसी कठिनाई का सामना होता है, तो रेलवे उसे हल करने के लिए तत्पर रहता है।

Read Also- Ancient Sculptures : अमेरिका ने भारत को लौटाईं 1400 से अधिक प्राचीन मूर्तियां, 80 करोड़ से ज्यादा है कीमत

Related Articles