जमशेदपुर : Tata Steel के संस्थापक जमशेदजी नसरवानजी टाटा की 185वीं जयंती 3 मार्च को मनाई जाएगी, जिसके लिए Tata Steel पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजा रही है। हालांकि आयोजन की तैयारी में मूल रूप से कंपनी लगी है, लेकिन शहर का वातावरण देखकर ऐसा लग रहा है, मानों पूरा शहर जेएन टाटा को अविस्मरणीय श्रद्धांजलि देने को आतुर हो। इसके लिए शहर के 33 गोलचक्कर व सात पार्क सहित 50 से ज्यादा भवन-स्थान रंगबिरंगी रोशनी से जगमगा रहे हैं।
संस्थापक दिवस के लिए इस बार भी विभिन्न गतिविधियों-कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है, जिसमें जुबिली पार्क, जमशेदपुर वर्क्स और पोस्टल पार्क में श्रद्धांजलि कार्यक्रम, प्रदर्शनियां, खेलकूद के अलावा बिष्टुपुर के एन रोड स्थित एसएनटीआई में विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी और जमशेदपुर वर्क्स स्थित स्टीलेनियम हॉल में प्रदर्शनी शामिल है।
पूरी दुनिया के दर्शकों के लिए जमशेदपुर वर्क्स में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का Tata Steel के आधिकारिक फेसबुक पेज पर सीधा प्रसारण किया जाएगा। संस्थापक दिवस के खेल कार्यक्रम जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और गोपाल मैदान में भी आयोजित किए जाएंगे, जिसमें कर्मचारियों और समुदाय के मनोरंजन के लिए कई खेल गतिविधियां शामिल होंगी।

Tata Steel
– संस्थापक दिवस के मुख्य आकर्षण
– 2 मार्च को शाम 6.30 बजे जुबिली पार्क की विद्युत प्रकाश सज्जा का टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन उद्घाटन करेंगे ।
– 3-5 मार्च तक शाम 6 बजे से रात 11.30 बजे तक शहरवासी जुबिली पार्क की विद्युत व प्रकाश सज्जा का आनंद उठा सकेंगे।
– 3 मार्च को सुबह 7 बजे से बिष्टुपुर स्थित जमशेदपुर वर्क्स में संस्थापक दिवस समारोह प्रारंभ हो जाएगा।
– 3 मार्च को सुबह 9.30 बजे से बिष्टुपुर स्थित पोस्टल पार्क में चेयरमैन संस्थापक को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद यहां लगभग 17 सामाजिक संस्थाओं की ओर से झांकी निकाली जाएगी, जबकि सेना के जवान, एनसीसी कैडेटों और घुड़सवार परेड करेंगे।
– 3 मार्च को दोपहर में जमशेदपुर वर्क्स के अंदर स्टीलेनियम हॉल और बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआई में 14वीं विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी टेक-एक्स-2024 शुरू होगी, जो 2-5 मार्च तक शहरवासियों के लिए खुली रहेगी। –
– 2-3 मार्च को जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और गोपाल मैदान में संस्थापक दिवस खेल कार्यक्रम होंगे।
Tata Steel – इन गोलचक्करों पर की गई विद्युत प्रकाश सज्जा

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दोराबजी पार्क के पास लेडी घांदी गोलचक्कर, दोमुहानी के पास डोबो गोलचक्कर, सीएच एरिया गोलचक्कर, बिष्टुपुर स्थित होटल सेंटर प्वाइंट के पास, बेल्डीह चर्च, आदित्यपुर स्थित खरकई पुल, कदमा स्थित एटीबीसीएल चौराहा, गोलमुरी में आरडी टाटा गोलचक्कर, बिष्टुपुर में गोपाल मैदान के पास शांति हरि टावर के सामने, बिष्टुपुर में बाग ए जमशेद, जुबिली पार्क-साकची गेट, कदमा-सोनारी लिंक रोड, टीएसएल, पीएन बोस मूर्ति, चमरिया गेस्ट हाउस, मानगो चौराहा, कदमा गोलचक्कर, टिनप्लेट चौराहा, आरएमसीई चौराहा, टीएमएच गोलचक्कर, रीगल गोलचक्कर, साकची गोलचक्कर, जुगसलाई में टाटा-पिगमेंट गोलचक्कर, पोस्टल पार्क, जीटी हॉस्टल-1 गोलचक्कर, जुस्को गोलचक्कर, कदमा गणेश पूजा मैदान, रंकिणी मंदिर, फ़्लैटलेट कदमा, जमशेदपुर स्कूल ऑफ आर्ट्स कदमा के पास, वोल्टास गोलचक्कर, पुराना कोर्ट चौराहा, आरपीएच चौराहा आदि।
Tata Steel – हेरिटेज भवनों की रोशनी

बिष्टुपुर स्थित टाटा वर्कर्स यूनियन कार्यालय, जुस्को श्रमिक यूनियन कार्यालय, टीएमएच, टाटा स्टील यूआईएसएल कारपोरेट कार्यालय, सेंटर फ़ॉर एक्सीलेंस (सीएफई) सामने का भाग, टाटानगर रेलवे स्टेशन, आरडी टाटा संस्थान, टाटा पिगमेंट गेट, स्कूल ऑफ होप, पारसी टेम्पल, क्लॉक टॉवर (गोलमुरी गोल्फ कोर्स), डीसी कार्यालय, एसएसपी कार्यालय, चमरिया गेस्ट हाउस, केएमपीएम कॉलेज/जेएनटीवीटीआई आदि।
पार्कों में रोशनी
दोराबजी टाटा पार्क, पोस्टल पार्क, बिरसा मुंडा पार्क, भाटिया पार्क, नीलडीह पार्क, रामनगर पार्क व न्यू बारीडीह पार्क (पांडेय मैदान)
जेएन टाटा ने 1870 में शुरू कर दी थी इस्पात कारखाने की गतिविधि
गुजरात के नवसारी में पारसी पुरोहित परिवार में जन्मे जमशेदजी नसरवानजी टाटा ने 1870 के दशक में मध्य भारत में एक कपड़ा मिल से अपनी उद्यमशीलता यात्रा शुरू की थी। लगभग उसी समय उन्होंने इस्पात कारखाने को लेकर गतिविधियां शुरू कर दी थीं। 1882 में जब जेएन टाटा की उम्र 43 वर्ष थी, ने जर्मन भूगर्भशास्त्री रिटरवॉन श्वार्ट्ज की एक रिपोर्ट पढ़ी थी।
इसमें मध्यप्रदेश के चंदा जिला में लौह अयस्क की उपलब्धता पर रिपोर्ट थी। इससे जेएन टाटा के मन में भारत में इस्पात संयंत्र की स्थापना करने का विचार आया। बताया जाता है कि उन्हीं के आग्रह पर वायसराय लॉर्ड कर्जन ने 1899 में खनिज नीति को उदार बनाया। 1900 में जेएन टाटा भारत के राज्य सचिव लॉर्ड हैमिल्टन से मिलने इंग्लैंड गए, जहां उन्हें भारत में इस्पात कारखाना की स्थापना करने का प्रस्ताव दिया। इसी क्रम में कई उतार-चढ़ाव आए और 27 फरवरी 1908 को जमशेदपुर में टाटा स्टील के कारखाना निर्माण का कार्य शुरू हुआ। 16 फरवरी 1912 को जमशेदपुर के कारखाना से इस्पात की पहली सिल्ली या इंगट का उत्पादन हुआ।
संस्थापक उनकी दूरदर्शिता ने भारत में इस्पात और बिजली उद्योग को प्रेरित किया, तकनीकी शिक्षा की नींव रखी और देश को औद्योगिक देशों की श्रेणी में शामिल होने में मदद की। प्रतिवर्ष Tata Steel सहित टाटा समूह की कंपनियां अपने संस्थापक की जयंती और सामुदायिक कल्याण को केंद्र में रखते हुए औद्योगिक भविष्य के उनकी दूरदर्शी सोच का जश्न मनाती हैं।
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