Home » Sheetla Mata Puja: जमशेदपुर में मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने किया शीतला माता पूजन, जानें इसका महत्व

Sheetla Mata Puja: जमशेदपुर में मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने किया शीतला माता पूजन, जानें इसका महत्व

शीतला माता की पूजा परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए की जाती है। इसे बासोड़ा पर्व भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता।

by Yugal Kishor
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

जमशेदपुर: मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने श्रद्धा और परंपरा के साथ शीतला माता का पूजन किया। यह समाज का विशेष पर्व है जिसे “बासोड़ा” भी कहा जाता है। इस पर्व को चैत्र कृष्ण अष्टमी के दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर भक्तों ने एक दिन पहले बनाए गए भोजन का शीतला माता को भोग अर्पित किया और ठंडा भोजन ग्रहण किया।

शीतला माता पूजन की परंपरा

शीतला माता की पूजा परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए की जाती है। मान्यता है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और माता को विशेष भोग चढ़ाया जाता है। इस विशेष भोग में मीठी पकौड़ी, मीठा भात, दही, राबड़ी एवं बाजरा आदि शामिल किए जाते हैं।

पूजन की विधि और विशेष नियम

समय: चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पूजन किया जाता है।
एक दिन पूर्व: शीतला सप्तमी के दिन भोजन पहले से तैयार कर लिया जाता है।
पूजा का विधान: अगले दिन शीतला माता की मंत्रों और विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है।
विशेष नियम: सप्तमी और अष्टमी के दिन सिर नहीं धोते, सिलाई नहीं करते और चक्की नहीं चलाते।

मंत्र और धार्मिक महत्व

शीतला माता का मंत्र “ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः” का जप करने से रोगों से रक्षा और शांति की प्राप्ति होती है। माता को बीमारियों से बचाने वाली देवी माना जाता है और यह पर्व मारवाड़ी समाज में विशेष रूप से मनाया जाता है।

जुगसलाई शिव मंदिर में किया गया अनुष्ठान

झारखंड के जमशेदपुर में जुगसलाई शिव मंदिर में शीतला माता का पूजन अनुष्ठान “बासोड़ा” का पूरे विधिपूर्वक किया गया। शिव मंदिर में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में महिलाओं और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और शीतला माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।

Related Articles