
Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा में पास कर दिया गया। इस संशोधन बिल पर 8 घंटे की लंबी बहस चली, जिसमें विपक्ष से लेकर मुस्लिम धर्म गुरुओं ने जमकर बवाल काटा।
लेकिन अब सवाल यह है कि आगे क्या। मुस्लिम लॉ बोर्ड क्या कर सकता है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। लखनऊ ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पास हो गया है, इससे बड़ी मायूसी हुई है।
उनका कहना है कि जितना भी संशोधन किया गया है वो वक्फ के लिए लाभदायक नहीं, बल्कि नुकसानदेह है। उन्होंने कहा कि अगर बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हो जाता है तो भी हमारे लिए कोर्ट का दरवाजा खुला है। हमें पूरी उम्मीद है कि कोर्ट से हमें इंसाफ मिलेगा।
दूसरे धर्म के व्यक्ति का शामिल होना, गैरकानूनी
उन्होंने कहा कि क्योंकि उनमें से कई कानून संविधान की धारा 14, 25, 26 और 29 के खिलाफ है। मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि AIMPLB के साथ ही अन्य संस्थाओं ने जो सुझाव जेपीसी के सामने रखे थे, उनको इस बिल में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वक्फ काउंसिल और बोर्ड में 4 गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की बात कही गई है। जबकि, किसी भी दूसरे धार्मिक ट्रस्ट और संस्थाओं में कानूनी तौर पर दूसरे धर्म का व्यक्त्ति शामिल नहीं हो सकता है।
यह अपने आप में बड़ी नाइंसाफी है। मौलाना रशीद का मानना है कि 90 फीसदी से ज्यादा वक्फ की जमीनें मस्जिदों, कब्रिस्तानों और दरगाहों के रूप में मौजूद है। आगे उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भी सरकार मानती है कि यह धार्मिक मामला नहीं है, यह अपने आप में एक अचंभे की बात है। वक्फ बिलइस्तिमाल के खत्म किए जाने से बहुत सी वक्फ प्रॉपर्टीज को नुकसान पहुंच सकता है।
5 साल से मुसलमान है, करना होगा साबित
मौलाना ने कहा कि जो बिल पेश किया गया है, इसमें इस फलास को शामिल करना कि किसी भी नॉन-मुस्लिम को यह साबित करना कि वह 5 साल से मुसलमान है, तब ही वह प्रापर्टी वक्फ या दान कर सकता है, यह देश के संविधान की धारा 26 के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में सदस्यों का चयन सरकार करेगी, जबकि अभी तक इलेक्शन के माध्यम से सदस्यों को चयनित किया जाता था। एक सेक्युलर देश में एक सेक्युलर तरीके से बनाए जाने वाले लोग नामजद बोर्ड की शक्ल दी जा रही है, जो कि अपने आप में गैर संवैधानिक कार्य है।
क्या है धारा 26
जनता के आदेश, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन, प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसका कोई भी हिस्सा यह अधिकार रखता है—
(a) धार्मिक और चैरिटेबल उद्देश्यों के लिए संस्थानों की स्थापना और रखरखाव करने के लिए
(b) धर्म के मामलों में अपने मामले प्रबंधित करने के लिए
(c) चल और अचल संपत्ति के मालिक होने और अधिग्रहण करने के लिए और
(d) कानून के अनुसार ऐसी संपत्ति का प्रशासन करने के लिए।

