
चाईबासा : झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चाईबासा में पार्टी द्वारा आयोजित पुतला दहन कार्यक्रम के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में झामुमो नेताओं ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए।
लोकतंत्र की साख पर सवाल, आयोग दे स्पष्टीकरण : सोनाराम
पत्रकारों को संबोधित करते हुए झामुमो के जिला अध्यक्ष सोनाराम देवगम ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की साख किसी भी राजनीतिक दल या सत्ता से ऊपर होनी चाहिए। मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) में पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी दिख रही है, जिससे जनता के मन में संदेह पैदा हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वोट किसी सरकार, दल या आयोग की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं, बल्कि भारत के हर नागरिक का मौलिक संवैधानिक अधिकार है।
देवगम ने कहा कि चुनाव आयोग का दायित्व केवल मतदान कराना ही नहीं, बल्कि हर पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा करना भी है। यदि पुनरीक्षण के नाम पर किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है या उसे अपने नागरिक अधिकारों को सिद्ध करने के लिए प्रताड़ित होना पड़ता है, तो यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत चिंताजनक है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला: सर्वसम्मति के दावों पर घेरा
झामुमो जिलाध्यक्ष ने एक राष्ट्रीय समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट का विशेष उल्लेख करते हुए आयोग को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के ही दो आयुक्तों ने SIR से जुड़े फैसलों पर औपचारिक रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग सार्वजनिक रूप से यह दावा कर रहा है कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यह विरोधाभास आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
बूथ वार जानकारी और निष्पक्ष जांच की मांग
झामुमो ने मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त राजनीतिक बयानबाजी से बचते हुए विपक्ष के प्रश्नों का तथ्यात्मक उत्तर दें।
पार्टी ने मांग रखी
– मतदाता सूची से नाम हटाने के आधार और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए।
– बूथवार स्तर पर की गई पूरी कार्यवाही का विवरण पारदर्शी तरीके से देश के सामने रखा जाए।
– बिना टेंडर या नियमों के विपरीत दिए गए कार्यों और जिम्मेदारियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।देवगम ने कहा कि देश की जनता ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली से भली-भांति परिचित हो चुकी है और उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। झामुमो जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए हर संवैधानिक मंच पर अपनी आवाज बुलंद रखेगा।
कार्यक्रम में दर्जनों कार्यकर्ताओं की रही मौजूदगी
इस विरोध प्रदर्शन और पत्रकार वार्ता में पार्टी के जिला सचिव राहुल आदित्य, इकबाल अहमद, रामलाल मुंडा, अशोक दास, अकबर खान, चंद्रमोहन बोदरा, विश्वनाथ बारा, दीपक प्रधान, बाबू भट्टाचार्य, गणेश बोदरा, अघना कंडुलना, सतीश सुंडी, नवाज हुसैन, विजय बारी, जवाहर बोयपाई, बसीद इकबाल, मनोज लागुरी, मोझाहिद अहमद, सोमबारी बहंदा, मंजीत कोड़ा, शहीद अहमद, बृन्दाबन गोप, लाला राउट, रमेश बिरुआ, अरविन्द कुंकल, दुर्गा चरण देवगम, नितेश माधव, मो० तवारक, मो० प्रिंच, बागुन सवाइयां, डुबलिया बारी, दामू बारी, जगदीश गोप, तुराम सुंडी, मन्नाराम कुदादा, राजू सुंडी, चंद्रमोहन देवगम, मोहन सुंबरुई, विजय सिंह पूर्ति, उदय चेरोवा, मनसुख हांसदा, अर्जुन सुनीता देवगम, शिला जमुदा, बसंती सुंडी, चिड़िया बुढिउली, हरिलाल कर्जी, प्रदीप तमसोय, भोला, बबलू, शेखर बारिक, कौशल सिन्हा, अर्जुन बनरा, जगदीश जमुदा, मुंडा, नितीश कच्चाप, तुरी कोड़ा, अमूल्य प्रधान, प्रीतम गुप्ता, कैरा सोय, शशि पूर्ति, भादो हांसदा, ताना हांसदा, कैलाश कलुंडिया, कैलाश सामाड, शारिक रजा, राजू प्रसाद, टुकना महतो, सम्राट प्रधान, जीतेन्द्र पूर्ति, राजकिशोर बोईपाई, कैरा कुंकल, नवाब अंसारी, सोमनाथ कुंकल, जयसिंह हेस्सा, सरवर नेहाल नज्जू, वसीम अकरम हुसैन, बंटी जुन्नैद, नयीम, केदार जायसवाल, बबलू गोडसोरा और बिरसा तियु सहित भारी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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