
बोकारो: औद्योगिक व व्यावसायिक क्षेत्र फुसरो में पिछले कई दिनों से जारी अनियमित बिजली कटौती ने स्थानीय लोगों और दुकानदारों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। मंगलवार को आक्रोशित व्यवसायियों और ग्रामीणों ने मिलकर बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। युवा व्यवसायी संघ के नेतृत्व में एकजुट हुए प्रदर्शनकारियों ने सब स्टेशन पर ताला जड़ दिया। साथ ही जैनामोड़ मुख्य मार्ग को घंटों जाम रखा।
बाजार बंद कर निकाला जुलूस
सुबह से ही फुसरो बाजार का नजारा बदला हुआ था। संघ के पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत व्यवसायियों ने अपनी-अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखीं और सड़कों पर उतर आए। बाजार की गलियों से होता हुआ यह जुलूस बिजली सब स्टेशन पहुंचा, जहां इलाके के ग्रामीण भी इस आंदोलन में शामिल हो गए।
सब स्टेशन परिसर में आयोजित सभा में वक्ताओं ने विभाग के रवैये पर जमकर भड़ास निकाली। आंदोलनकारियों का कहना था कि बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों बिजली गुल रहने से व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। आम नागरिक और ग्रामीण इलाके के लोग गर्मी व अंधेरे में जीने को मजबूर हैं।
अधिकारी से बहस के बाद बढ़ा तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा

धरने के दौरान उस समय स्थिति बिगड़ गई जब वार्ता के लिए पहुंचे तेनुघाट के कार्यपालक अभियंता प्रभाकर कुमार और व्यवसायियों के बीच तीखी बहस हो गई। करीब आधे घंटे तक चले इस हंगामे और तनातनी के बाद नाराज व्यवसायियों ने बातचीत का बहिष्कार कर दिया। माहौल गरम होते ही स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
इसके बाद उग्र प्रदर्शनकारी हिंदुस्तान पुल के पास पहुंचे और फुसरो-जैनामोड़ मार्ग पर यातायात ठप कर दिया। आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि जब तक निर्बाध बिजली आपूर्ति की गारंटी नहीं मिलती, वे स्मार्ट मीटर जैसे अन्य मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं करेंगे।
अधिकारी ने जताया खेद, स्थायी समाधान की आस
बिजली विभाग के अधिकारियों ने सब स्टेशन की आपूर्ति ठप कर आंदोलन करने पर नाराजगी जताई। अधीक्षण अभियंता का कहना था कि सब स्टेशन बंद करने से सुधार का काम और वार्ता दोनों बाधित होते हैं। हालांकि, माहौल को शांत करने के लिए कार्यपालक अभियंता प्रभाकर कुमार ने बातचीत के दौरान हुई बहस पर खेद प्रकट किया।
फिलहाल, फुसरो और आसपास के इलाकों में बिजली की समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान न निकलने से स्थानीय लोगों में असंतोष बरकरार है। व्यवसायियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित बिजली नहीं मिली, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।
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