
Dhanbad (Jharkhand): झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां टीबी (तपेदिक) के मरीजों को घटिया गुणवत्ता वाली दवा खिलाने की शिकायत मिली है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य टीबी पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने धनबाद के सिविल सर्जन डॉ. चंद्रभानु प्रतापन और जिला टीबी पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
400 से अधिक मरीजों को खिलाई गई घटिया दवा
डॉ. कमलेश कुमार ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें यह भी जानकारी चाहिए कि अब तक कितने मरीजों को यह दवा खिलाई गई है। उन्होंने बताया कि धनबाद में पहले से ही टीबी उन्मूलन अभियान की प्रगति रिपोर्ट संतोषजनक नहीं रही है और लगातार सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में इस प्रकार की लापरवाही अभियान के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जांच के बाद जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
टीबी के मरीजों को आमतौर पर 4 एफडीसी (फिक्स्ड-डोज़ काम्बिनेशन) दवा खिलाई जाती है। इस दवा में चार प्रमुख दवाएं शामिल होती हैं: 150 मिलीग्राम रिफैम्पिसिन, 75 मिलीग्राम आइसोनियाज़िड, 400 मिलीग्राम पाइराज़िनामाइड और 275 मिलीग्राम एथमब्यूटोल। यह दवा टीबी के मरीजों को छह से आठ महीने के इलाज में ठीक करने में मदद करती है। बताया जा रहा है कि धनबाद के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लगभग 16 लाख रुपये की यह दवा स्थानीय स्तर पर खरीदी थी और इसे चार से पांच महीने तक मरीजों को खिलाया गया। जब मरीजों को इस दवा से कोई फायदा नहीं हुआ, तो उन्होंने इसकी शिकायत विभाग से की।
ड्रग इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दवा के नमूने की जांच कराई, जिसमें यह टीबी की दवा सब स्टैंडर्ड (घटिया गुणवत्ता वाली) पाई गई। जब तक इस जांच की रिपोर्ट आई, तब तक विभाग 400 से ज्यादा मरीजों को यह दवा खिला चुका था। अब यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और यह देखना होगा कि जांच के बाद इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।

