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Teachers Day Spacial Jharkhand : ‘गुरुजी’, जिन्होंने वेतन बगैर बालिका शिक्षा को समर्पित कर दी जिंदगी, रिटायरमेंट के बाद भी पढ़ा रहे हैं छात्राओं को

शिक्षक दिवस विशेष : Dumka Teacher Ram Prasad Pandit

by Anand Mishra
Teachers Day Spacial Jharkhand
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Teachers Day Spacial Jharkhand : शिक्षक दिवस के इस खास मौके पर हम आपको एक ऐसे असाधारण शिक्षक से मिलवा रहे हैं, जिन्होंने शिक्षा को अपना जुनून बना लिया है। ये हैं झारखंड के दुमका जिला स्थित रामगढ़ प्रखंड में रहने वाले राम प्रसाद पंडित, जिन्हें लोग प्यार से ‘गुरुजी’ कहते हैं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बिना किसी वेतन के छात्राओं को शिक्षा देने में लगा दी। प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय में ताउम्र सेवा देने के बाद वे 2024 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन पढ़ाने का उनका जज्बा आज भी कम नहीं हुआ है।

गोड्डा से आकर रामगढ़ को बनाया कर्मभूमि

मूल रूप से गोड्डा के रहने वाले राम प्रसाद पंडित का जीवन संघर्ष से भरा रहा है। उनके पिताजी बर्तन बनाकर परिवार चलाते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और सातवीं कक्षा से ही ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। स्नातक के बाद 1984 में वे अपने मामा के घर दुमका आ गए और तब से यहीं के होकर रह गए।

Teachers Day Spacial Jharkhand : सरकार ने नहीं दिया वेतन के नाम पर एक भी पैसा, फिर भी नहीं मानी हार

वर्ष 1984 में जब जनसहयोग से प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय की स्थापना हुई, तो राम प्रसाद पंडित यहां शिक्षक के रूप में शामिल हुए। 1988 में तत्कालीन बिहार सरकार ने इस विद्यालय को मान्यता दी, लेकिन अनुदान नहीं मिला। धीरे-धीरे अन्य शिक्षक विद्यालय छोड़कर चले गए, लेकिन राम प्रसाद पंडित अकेले डटे रहे।

मैट्रिक की परीक्षा में शत-प्रतिशत रिजल्ट

उनकी निस्वार्थ सेवा का ही नतीजा है कि आज भी यह विद्यालय जीवित है। सेवानिवृत्ति के बाद भी विद्यालय प्रबंधन समिति ने उन्हें दो साल का सेवा विस्तार दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। राम प्रसाद पंडित सिर्फ शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति, किताबें और बैग जैसी जरूरी चीजों की व्यवस्था भी करवाते हैं। इस वर्ष आयोजित मैट्रिक की परीक्षा में उनकी पढ़ाई हुई 46 छात्राओं में सभी ने सफलता हासिल की है। आज भी इस विद्यालय में 105 छात्राएं शिक्षा ले रही हैं।

Teachers Day Spacial Jharkhand : वेतन नहीं मिलने का मलाल, आधी आबादी को शिक्षित करने का सुकून भी

राम प्रसाद पंडित कहते हैं, “सरकार ने वेतन नहीं दिया इसका मलाल जरूर है, लेकिन खुशी इस बात की है कि मैं आधी आबादी को शिक्षित कर रहा हूं।” उनका कहना है कि वे अपनी अंतिम सांस तक यह सेवा जारी रखेंगे।

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