चतरा : चतरा में जमीन का विवाद एक बार फिर खून से लाल हो गया। कुंदा थाना क्षेत्र के गेंदरा गांव में रविवार देर रात करीब 12 बजे जमीन को लेकर हुए हिंसक संघर्ष ने दो जिंदगियां छीन लीं, जबकि दो ग्रामीण जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। घटना के बाद गांव में तनाव और दहशत का माहौल बना हुआ है। वहीं पुलिस ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रारंभिक छानबीन मे पता चला है कि,यह विवाद लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है, जो अचानक उग्र हो गया। देखते ही देखते दो गुटों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई जो जानलेवा हमला तक पहुंच गई।
पुलिस का क्या कहना है
पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान देवेंद्र गंझू और चुरामन गंझू के रूप में की गई है। दोनों तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) से जुड़े थे और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
घटना में गांव के ही गोपाल गंझू और श्याम गंझू गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
अपराध और नक्सल कनेक्शन की जांच
घटना की सूचना मिलते ही कुंदा थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रण में लिया। पूरे गांव को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि देर रात अचानक हुई इस हिंसक वारदात से पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग डर के कारण अपने घरों में ही दुबकने को मजबूर हो गए। स्थानीय प्रशासन ने एहतियातन गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।
भूमि विवाद एक गंभीर समस्या
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जमीन विवाद से जुड़े सभी दस्तावेजों, पुराने मामलों और आपसी रंजिश की गहन जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना में और कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
झारखंड में भूमि विवाद को लेकर हिंसक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन से जुड़े मामलों में प्रशासनिक स्तर पर समय रहते समाधान नहीं होने के कारण ऐसे विवाद गंभीर रूप ले लेते हैं, जिनका अंत जानलेवा संघर्ष में होता है।
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