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President Draupadi Murmu Jamshedpur : कानूनी जानकारी की कमी से निर्दोष जेल जा रहे, अपनी भाषा में संविधान जानना जरूरी : राष्ट्रपति

जमशेदपुर में 22वें संथाली भाषा दिवस और ओल चिकि लिपि के शताब्दी उत्सव वर्ष समारोह में शामिल हुईं द्रौपदी मुर्मु

by Mujtaba Haider Rizvi
President Draupadi Murmu Jamshedpur (2)
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Jamshedpur : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है। इसलिए देश के नियम-कानूनों की जानकारी अपनी भाषा में लोगों तक पहुंचनी चाहिए। कानूनी प्रावधानों की अज्ञानता के कारण कई निर्दोष लोग जेल की सलाखों के पीछे पहुंच जाते हैं। राष्ट्रपति ने भारतीय संविधान के संताली अनुवाद का जिक्र करते हुए बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के अवसर पर इसी साल 26 दिसंबर को ओलचिकी लिपि में संविधान का प्रकाशन किया गया। उन्होंने इसे संताली समाज को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार को जमशेदपुर के करनडीह स्थित जाहेरथान परिसर में 22वें संथाली भाषा दिवस और ओल चिकि लिपि के शताब्दी उत्सव वर्ष समारोह को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम स्थल आने से पहले उन्होंने जाहेरथान में पूजा-अर्चना की। इस दौरान झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उनके साथ मौजूद रहे। इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोनों ने समारोह को संताली भाषा में संबोधित किया।


समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने संताली साहित्यकारों की प्रशंसा की और कहा कि आदिवासी स्वाभिमान एवं अस्तित्व की रक्षा में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि ओलचिकी से जुड़ा यह संगठन हर वर्ष उत्सव आयोजित करता है और अपने व्यस्त दैनिक जीवन से समय निकालकर कई भाई-बहन इस लिपि के प्रचार-प्रसार में जुटे हैं तथा पंडित रघुनाथ मुर्मू के कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आज संथाली में गूगल और विकीपीडिया उपलब्ध है। यह बड़ी उपलब्धि है।

राष्ट्रपति ने चिंता जताई कि संताली समाज अभी उतना शिक्षित नहीं हो पाया है जितना होना चाहिए। इसलिए अपनी मातृभाषा में सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज जिस स्थान पर मैं पहुंची हूं, यहां तक आने में मेरे समाज के लोगों के स्नेह और इष्टदेवों के आशीर्वाद का बड़ा योगदान है। अपने कर्तव्य का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि समाज और अपनी लिपि के लिए कार्य करना मेरा दायित्व है।

उन्होंने बताया कि भारत ही नहीं, विश्व के कई हिस्सों में संताल समुदाय बसा हुआ है। बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक संताली भाषी लोग फैले हुए हैं। आदिवासी समुदायों में संताली की जनसंख्या सबसे अधिक है, इसलिए इसका अपना अधिकार सुनिश्चित है। ओलचिकी इस भाषा की मजबूत पहचान है और इसी के माध्यम से समाज में एकजुटता बढ़ रही है। इस तरह के आयोजन भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रपति ने अपील की कि ओलचिकी को और समृद्ध बनाने के लिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर व्यक्ति को इसका अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। समारोह को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार तथा झाड़ग्राम के सांसद कालूीपदो सोरन ने भी संबोधित किया।

हेमंत ने दिया राष्ट्रपति को धन्यवाद

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संताली भाषा में संविधान लांच करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पूरे देश में आदिवासी रहते हैं। पंडित रघुनाथ मुर्मू ने ओलचिकि लिपी का आविष्कार कर हमें पहचान दिलायी। इसके लिए आदिवासी समुदाय पंडित रघुनाथ मु्र्मू का आभारी रहेगा।

राष्ट्रपति ने संताली में गाया जाहेर गीत

समारोह को संबोधित करने से पहले द्रौपदी मुर्मु ने संथाली भाषा में करीब तीन मिनट तक पारंपरिक ‘नेहोर गीत’ गाया. राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने बचपन में यह प्रार्थना गीत सीखा था। इसमें ‘जाहेर आयो’ (प्रकृति माता) से समाज को हमेशा उजाले के मार्ग पर ले जाने की कामना की गई है।

लोकभवन के द्वार पर दिखेगी ओलचिकि

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल से कहा है कि वे झारखंड के लोकभवन के मुख्यद्वार पर ओलचिकि लिपि में भी लोकभवन लिखवायें। इसपर राज्यपाल ने सिर हिलाकर अनुमोदन किया

संताली की 12 विभूतियां सम्मानित

समारोह में संथाली कला एवं साहित्य के क्षेत्र में काम करने के लिए 12 लोगों को पुरस्कृत किया गया। इनमें भोलनाथ बेसरा, दमयंती बेसरा, मुचिराय हेंब्रम, भीमवार मुर्मू, सलखू मुर्मू, रामदास मुर्मू, मुंडा सोरेन, छोटराय बास्के, निरंजन हांसदा, टाटा स्टील फाउंडेशन की तरफ से वीपी कॉरपोरेट सर्विसेज सुंदररामम तथा सौरव राय, शिवशंकर कंदेमोय तथा सीआर माझी शामिल हैं।

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