देवघर : झारखंड के देवघर जिले के बहुचर्चित रिखिया थाना कांड में जिला न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए सभी 19 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया। इस फैसले के साथ लंबे समय से चल रहे इस मामले का पटाक्षेप हो गया।
रिखिया थाना कांड: 2019 लोकसभा चुनाव से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान बैजनाथपुर चौक पर हुई घटना से संबंधित था। आरोप था कि ईवीएम से भरे एक ट्रक को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसके बाद सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया गया था।
लूट और नुकसान के आरोप साबित नहीं हो सके
अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि इस दौरान वाहन को रोकने, लूटपाट करने और नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं हुई थीं। हालांकि, अदालत में सुनवाई के दौरान यह साबित नहीं हो सका कि किसी वाहन की लूट हुई थी या उसे कोई क्षति पहुंचाई गई थी। ठोस साक्ष्य के अभाव में मामला कमजोर पड़ गया।
गवाहों के बयान से कमजोर हुआ केस
सुनवाई के दौरान कई गवाह अपने पूर्व बयानों पर कायम नहीं रह सके, जिससे अभियोजन पक्ष की दलीलें कमजोर हो गईं। पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने के कारण अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतीक रंजन की अदालत का फैसला
इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतीक रंजन की अदालत ने सभी 19 आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया। फैसले के बाद अदालत परिसर में मौजूद आरोपितों और उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली।
आरोपितों का पक्ष: ‘साजिश के तहत दर्ज किया गया था मामला’
फैसले के बाद सुरेश शाह ने कहा कि यह मामला उनकी छवि खराब करने के लिए साजिश के तहत दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय ईवीएम से जुड़े संदेह के कारण कुछ लोगों ने विरोध किया था, लेकिन किसी प्रकार की लूट या नुकसान नहीं हुआ था। उन्होंने न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए कहा कि अदालत के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।”
अन्य आरोपियों को भी मिली राहत
इस मामले में शशांक शेखर भोक्ता समेत कुल 19 लोगों को आरोपियों बनाया गया था। अदालत के फैसले के बाद सभी को राहत मिली है, जिससे यह मामला कानूनी रूप से समाप्त हो गया है।

