RANCHI: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने झारखंड विधानसभा में मंगलवार को राज्य का अबुआ बजट पेश किया। इसमें उन्होंने 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। राज्य की प्रगति के लिए वित्त मंत्री ने सभी क्षेत्रों पर फोकस करने की कोशिश की है। ऐसा माना जा रहा है कि इस बजट से राज्य में विकास के नए द्वार खुलेंगे। हालांकि इस पर राजनीतिक दलों के नेता, युवाओं, डॉक्टरों और सोसाइटी के आम लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने इसे विकास विकास के नए द्वार खोलने वाला बजट बताया, तो कई लोगों ने विकास और युवा विरोधी।
देखें किसने क्या कहा

बजट राज्य के समग्र विकास, सामाजिक न्याय, आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत और दूरदर्शी कदम है। सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और बुनियादी ढांचे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संतुलित और प्रभावी प्रावधान किए हैं। ग्रामीण विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष योजनाओं का विस्तार राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देगा। सिंचाई, सड़क और बिजली जैसी आधारभूत सुविधाओं पर बढ़ा हुआ निवेश ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई को कम करने में सहायक होगा। युवा वर्ग के लिए रोजगार सृजन, कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाले प्रावधान अत्यंत सराहनीय हैं। इससे राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में बेहतर अवसर मिलेंगे। महिलाओं के सशक्तिकरण, छात्रवृत्ति योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में बढ़ोतरी, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, नए अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण से आम जनता को राहत मिलेगी। साथ ही, उद्योग और निवेश को प्रोत्साहन देने के प्रयास राज्य में आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करेंगे।
केशव महतो कमलेश, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

राज्य सरकार का 2026-27 केलिए प्रस्तुत बजट दिशाहीन तथ्यहीन बजट। यह बजट रंगहीन है और खुशबू विहीन भी। 1.58 लाख करोड़ का बजट प्रस्ताव केवल गोल मटोल आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण है। इसमें राज्य के विकास का कोई विजन नहीं दिखाई पड़ता है। ऐसा लगा कि वित्त मंत्री जी आधे मन से भाषण पढ़ रहे थे। एकबार भी मुख्यमंत्री ने मेज थपथपा कर प्रोत्साहित नहीं किया। वित्तमंत्री आदर्श बजट बता रहे थे। राज्य के सभी वर्गों युवा,किसान,महिला,उद्यमी से सलाह लेकर बनाया गया बजट बता रहे थे। लेकिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्वयं कुछ दिनों पूर्व बयान दिया था कि बजट के विषय में मुझे कोई जानकारी नहीं,मुझसे पदाधिकारी कुछ पूछ नहीं रहे। समझ में नहीं आता कि राज्य सरकार किस दिशा में और कैसे चल रही है जिसमें राज्य के वित्त मंत्री ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण बयान देते हैं। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा दी गई वित्तीय सहायता का सही उपयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने झारखंड को अनेक योजनाओं और सहायता प्रदान की, लेकिन राज्य सरकार ने इनका सही तरीके से लाभ नहीं उठाया। 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपए की बात हेमंत सरकार कर रही है। लेकिन आजतक इसकी डिटेल नहीं दे पाई कि कब से बकाया है।
आदित्य साहू, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

राज्य का बजट जो विधानसभा में पेश किया गया है उससे आंगनवाड़ी कर्मचारी, स्वास्थ्य सहिया, जल सहिया,पोषण सखी को फिर निराशा हुई है। इस बजट से आंगनबाड़ी कर्मचारियों को उम्मीद थी कि केंद्रीय बजट में केंद्र सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कर्मचारी के लिए कोई नहीं प्रावधान किया गया। कम से कम झारखंड सरकार उनके जायज मांग जैसे सरकारीकरण, पेंशन का प्रावधान, मानदेय में बढ़ोतरी पर ध्यान देती। उसी प्रकार स्वास्थ्य सहिया,जल सहिया, पोषण सखी के मानदेय में बढ़ोतरी को लागू करेगी लेकिन बजट में इसका प्रावधान न होने से इन कर्मचारियों में निराशा है।
अशोक कुमार सिंह नयन

ये बजट समावेशी और विकासोन्मुख है। इसमें सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिली है। यह बजट राज्य के गरीब, किसान, युवाओं और कमजोर वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आम जनता के लिए सकारात्मक दिशा में एक बेहतर कदम है। योजनाओं के लागू करने और वास्तविकता आने वाले दिनों में देखने को मिलेगी।
प्रमोद कुमार

बजट सामाजिक सरोकारों को मजबूत करने वाला है। दिव्यांगजनों और वृद्धों के लिए पेंशन प्रावधान सराहनीय कदम है। बच्चों के पोषण, नए आंगनबाड़ी केंद्रों और कुपोषण मुक्ति पर जोर भविष्य को सशक्त बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल है। स्वास्थ्य सेवाओं तथा खेल व युवा गतिविधियों को बढ़ावा देना राज्य के समग्र विकास का संकेत देता है। वहीं अनुबंध कर्मियो के झोली में फिर से निराशा आई। योग को भी विशेष स्थान नहीं दिया गया है। जबकि दूसरे राज्य में योग को विशेष विषय में शामिल किया गया है।
डॉ. संतोषी कुमारी

अबुआ दिशोम बजट में छात्र और युवा वर्ग के लिए कुछ भी नहीं दिया गया है। 1 विश्विद्यालय देकर छात्र और युवाओं को ठगने का प्रयास है। सरकार अपने सत्ता के नशे में चूर हकर छात्र और युवा विरोधी कार्य कर रही है। शिक्षा के क्षेत्र में भी कुछ विशेष ध्यान नहीं दिया गया। न रोजगार, न ही शिक्षा और न ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार काम कर रही है। युवा पढ़ाई-लिखाई छोड़ छात्रवृत्ति व रोजगार के लिए आंदोलन कर रहे है। बजट में बेरोजगारी दूर करने के लिए किसी भी प्रकार की योजना नहीं है। न ही अपने वादा के अनुरूप सरकारी बहाली कर पा रही है।
ओम वर्मा, आजसू

अबुआ दिशोम बजट ऐतिहासिक है। जेएमएम कांग्रेस-राजद के साथ संयुक्त रूप से महागठबंधन सरकार में राज्य तेजी से विकास कर रहा है। वित्त मंत्री ने राज्य के चहुंमुखी विकास का लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रामीण विकास में अर्थव्यवस्था की मजबूती,शिक्षा स्वास्थ चिकित्सा, पर्यटन, कृषि, उद्योग, सड़क, पुल-पुलिया बनाने सहित नौकरी-पेशा को बढ़ावा और बेरोजगारी पलायन दूर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य में एसटी-एससी-ओबीसी सहित कमजोर सामान्य वर्गों की मजबूती के लिए निजी क्षेत्रों में रोजगार सृजन का लक्ष्य पूरा होगा। चतरा में बाबा साहब अंबेडकर के नाम से विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा स्वागत योग्य है।
कैलाश यादव, राजद

बजट में स्वास्थ विभाग के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। झारखण्ड में कैंसर मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। रिम्स में पीजी सीटें बढ़ाने की बात की गई है। लेकिन रिम्स कर्मचारियों को अभी तक पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। राज्य स्वास्थ्य बीमा भी नहीं कराया गया है। इस पर बजट में प्रावधान किया जाना चाहिए था। राज्य में अनुबंध और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को बंद करना चाहिए।
सुशांत कुमार साहू

