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Jharkhand Assembly : बिजली उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जारी होगा टोल फ्री नंबर, मंत्री ने विधानसभा में दी जानकारी

Jharkhand Assembly : जल संसाधन मंत्री हाफिजुल हसन ने कहा कि जल उनके विभाग में जो 50 सालों में नहीं हुआ, उसे मैं 5 साल में करके दिखाऊंगा।

by Kanchan Kumar
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रांची : बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं को देखते हुए विभाग उपभोक्ताओं की सुविधा को लेकर टोल फ्री नंबर जारी करने जा रहा है। ताकि गर्मी के मौसम में उन्हें परेशानी न हो। राज्य सरकार के ऊर्जा मंत्री देवेंद्र प्रसाद ने झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को सदन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता एग्जीक्यूटिव इंजीनियर या डिवीजन कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों पर संज्ञान लिया जाएगा।

डुमरी विधायक जयराम महतो ने बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर बात उठाई थी। कहा कि राज्य के कई इलाकों में ट्रांसफार्मर जलने या बिजली के तार खराब होने के बाद लंबे समय तक बिजली बहाल नहीं हो पाती। इस वजह से आम लोगों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने सरकार पूछा कि ऐसी स्थिति में उपभोक्ता अपनी शिकायत आखिर कहां दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि अधिकतर लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि ट्रांसफार्मर जलने, तार टूटने या अन्य तकनीकी खराबी होने पर शिकायत किस अधिकारी या कार्यालय में करनी चाहिए। उधर सरकार के जल संसाधन मंत्री हाफिजुल हसन ने कहा कि जल उनके विभाग में जो 50 सालों में नहीं हुआ, उसे मैं 5 साल में करके दिखाऊंगा।

सुरेश पासवान ने कहा, बजट काबिले तारिफ

देवघर विधायक सुरेश पासवान ने कहा कि आज सिंचाई विभाग ने जो डैम बनाया, उस पर विपक्ष के लोग कुछ नहीं कहते हैं। त्रिकुट जलाशय योजना को भी बनाया जाना चाहिए। पतरातू, चांडिल, मैथन, मसानजोर, स्वर्णरेखा डैम बने हैं। वहां मछली पालन से लोगों को रोजगार भी मिला। विपक्ष को नकारात्मक चीजें अधिक दिखती हैं। आज किसानों को राहत मिल रही है, पानी मिल रहा है। सरकार ने जो बजट पेश किया है, वह काबिले तारिफ है।

भूमि और विस्थापन पर गंभीरता से सोचने की जरूरत : मरांडी

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में जमीन को लेकर दो एक्ट है। यहां के लोगों के हाथों से जमीन चली जाने पर उन्हें पलायन करना पड़ता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अगर लोगों की जमीन ली जा रही हैं तो उन्हें कहीं और जमीन ही मिले। सरकार को भूमि और विस्थापन को लेकर गंभीरता से सोचना चाहिए।

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