Hazaribagh: जिले के केरेडारी प्रखंड अंतर्गत जोरदाग गांव में गुरुवार को पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के आवास पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे जमींदोज कर दिया। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रहे जमीन और मुआवजा विवाद के कारण की गई। मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
बताया जा रहा है कि योगेंद्र साव अपनी पत्नी और बड़कागांव की पूर्व विधायक निर्मला देवी के साथ बीते कई दिनों से अपने घर पर धरना दे रहे थे। उनकी मांग थी कि अधिग्रहित जमीन के बदले मिलने वाली मुआवजा राशि में बढ़ोतरी की जाए। वहीं एनटीपीसी अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित मुआवजा पहले ही तय किया जा चुका था और राशि लेने से इनकार करने के बाद इसे ट्रिब्यूनल में जमा कर दिया गया था।
प्रशासन के अनुसार, चट्टी बरियातू कोल खनन परियोजना के विस्तार में इस विवाद के कारण लगातार बाधा उत्पन्न हो रही थी। कई दौर की बातचीत और समझौते के प्रयास के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल सका, जिसके बाद प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
एनटीपीसी के अधिकारियों की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
गुरुवार को केरेडारी अंचलाधिकारी और एनटीपीसी के अधिकारियों की मौजूदगी में तीन पोकलेन मशीनों से मकान को ध्वस्त किया गया। पूरे अभियान के दौरान इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कार्रवाई को बताया गलत
कार्रवाई के बाद योगेंद्र साव की पुत्री और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया के माध्यम से कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए प्रशासन और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायपालिका पर उन्हें पूरा भरोसा है और वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगी।
इस घटना के बाद इलाके का राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे के और तूल पकड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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