रांची। ट्रेजरी घोटाला पर भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर से सुनियोजित तरीके से दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। कहा कि सरकार मामले में निष्पक्ष जांच कराने के बजाय इसे सुनियोजित तरीके से दबाने में लगी है।
बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राज्य सरकार ने केवल तीन साल से अधिक समय से एक ही पद पर कार्यरत क्लर्कों के तबादले का आदेश जारी किया है, जबकि पुलिस अधीक्षक (एसपी), पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) और ट्रेजरी अधिकारी अब भी अपने पदों पर बने हुए हैं। मुख्य आरोप इन्हीं अधिकारियों पर हैं, जिन्हें अब तक नहीं हटाया गया है।
मामले की जांच ईडी और सीबीआई से कराने की मांग
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सरकार का रवैया यह संकेत देता है कि इस मदर ऑफ स्कैम को दबाने की कोशिश हो रही है। इस पूरे मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो भाजपा भविष्य में आंदोलनात्मक कदम उठाएगी।
उन्होंने बताया कि उत्पाद सचिव के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने शुरुआत में वर्ष 2020 से रिकॉर्ड मांगा था और 8 मई को टीम बोकारो जाने वाली है। हालांकि महालेखा परीक्षक (एजी) की आपत्ति के बाद अब वर्ष 2011 से रिकॉर्ड मांगा जा रहा है। प्रतुल के अनुसार, यह कदम जांच को कमजोर करने की मंशा से उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि जांच समिति में सीआईडी के वर्तमान आईजी को शामिल नहीं कर पुलिस के मानवाधिकार आईजी को जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही एसआईटी के कुछ सदस्य ऐसे हैं, जिनका कार्यकाल उन जिलों में रहा है, जहां कथित तौर पर ट्रेजरी घोटाले की घटनाएं हुई थीं।
बोकारो ट्रेजरी में जमा 14 किलो सोना का हो भौतिक सत्यापन
उन्होंने आरोप लगाया कि बोकारो ट्रेजरी के स्ट्रांग रूम में 12 से 14 किलो सोना जमा है, जिसकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने मांग की कि एसआईटी स्ट्रांग रूम की जांच कर सोने का भौतिक सत्यापन करे।
प्रतुल शाहदेव ने झारखंड वित्तीय नियमावली और ट्रेजरी कोड के नियम 305 का हवाला देते हुए कहा कि डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों को अपने दायित्वों के प्रति गंभीर होना चाहिए, लेकिन एक माह बीत जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी अपने पदों पर बने हुए हैं, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रिंसिपल एजी की 2 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट में ट्रेजरी में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के प्रमाण सामने आए थे। रिपोर्ट के अनुसार 58 प्रतिशत डीए में असामान्य वृद्धि, मास्टर डाटा नियंत्रण में गंभीर खामियां, 2175 मामलों में जन्मतिथि में बदलाव, 2890 पैन नंबर में गड़बड़ी और 5037 कर्मचारियों की ज्वॉइनिंग तिथि में छेड़छाड़ पाई गई थी।

