रांची। झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को टेंडर कमीशन घोटाला में झारखंड हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। पूर्व मंत्री की ओर से पीएमएलए कोर्ट से उनकी डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज होने और अदालत की ओर से उनपर आरोप गठित करने को चुनौती देने वाली याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने आलमगीर आलम को राहत नहीं देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
इससे पहले सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद 26 अप्रैल को अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अदालत की ओर से याचिका खारिज किए जाने के बाद अब आलमगीर आलम के खिलाफ ट्रायल शुरू होगा।
मंत्री की ओर से बताया गया – उनके यहां से नहीं मिले थे पैसे
सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की ओर से कहा गया था कि इस मामले में उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है, लेकिन ईडी ने मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के मामले में ही चार्जशीट कर दिया। उनके यहां से पैसे भी बरामद नहीं हुए थे। ऐसे में उन्हें राहत मिलनी चाहिए।
ईडी की ओर से अधिवक्ता एके दास और सौरव कुमार ने अदालत को बताया था कि पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को भी टेंडर आवंटन के बाद कमीशन का पैसा मिलता था। उनके पीएस संजीव लाल के यहां से मिली डायरी में लिखा गया था कि मंत्री को भी कमीशन का पैसा दिया जाता है। ऐसे में उन्हें राहत नहीं दी जा सकती है।
कमीशन घोटाला मामले में ईडी ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके ओएसडी संजीव लाल और नौकर जहांगीर आलम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।
ईडी ने छह मई 2024 को कई इंजीनियरों, ठेकेदारों तथा संजीव लाल और उनके नौकर जहांगीर आलम के ठिकानों पर छापामारी की थी। छापामारी के दौरान संजीव लाल के सहायक जहांगीर आलम के हरमू स्थित आवास से लगभग 32.20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। संजीव लाल के आवास से 10.50 लाख रुपये और सचिवालय स्थित कार्यालय से 2.30 लाख रुपये बरामद हुए थे।

