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Ramgarh News: मुआवजा के लिए रैयतों ने सीधे रामगढ़ डीसी को बनाया था पार्टी; 22 साल बाद कोर्ट में जमा होगी राशि

by Kanchan Kumar
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रामगढ़ : 22 साल बाद उपायुक्त की पहल पर कोर्ट में मुआवजा राशि जमा कराई जाएगी। पूरा मामला रामगढ़ डीसी की पहल पर सुलझ पाया है। मामला इसलिए भी पेचीदा बन गया था कि राशि सीसीएल को भुगतान करनी है। जमीन उसी के लिए अधिग्रहण की गई थी। लेकिन रैयतों ने भूमि अधिग्रहण के बाद सीधे डीसी के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। मामले में अदालत ने डीसी की चल संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया। इसके बाद उपायुक्त गंभीर हुए। रामगढ़ डीसी ऋतुराज की पहल पर 25 मई से पहले सीसीएल पूरी रकम जमा करने के लिए तैयार हो गया है।

मामला बरका सायल सीसीएल प्रक्षेत्र से जुड़ा है। डीसी ऋतुराज की ओर से बनाए गए दबाव के कारण 22 साल के बाद सीसीएल प्रबंधन पूरी रकम कोर्ट में जमा करने के लिए तैयार हो गया है।

सीसीएल प्रबंधन ने वर्ष 1986 में बरका सायल प्रक्षेत्र में भूमि का अधिग्रहण किया था। सीसीएल की ओर से प्रस्तावित मुआवजा राशि पर ग्रामीणों ने सहमति नहीं जताई। उन्होंने सीसीएल प्रबंधन से अधिक मुआवजे की मांग रखी थी। इसे लेकर जब ग्रामीणों ने कोर्ट में मुकदमा दायर किया, तब उन्होंने सीधे रामगढ़ डीसी को पार्टी बनाया।

अधिग्रहण के बाद ग्रामीणों की जमीन का इस्तेमाल सीसीएल प्रबंधन कर रहा था। मुआवजा भुगतान भी सीसीएल प्रबंधन को ही करना था। लेकिन ग्रामीणों ने सीधा जिला प्रशासन को पार्टी बनाकर मुआवजे की रकम में बढ़ोतरी करने की फरियाद कोर्ट से की।

कोर्ट ने 15 प्रतिशत ब्याज जोड़कर रकम देने का दिया था आदेश

कोर्ट ने वर्ष 2004 में 15 प्रतिशत ब्याज जोड़कर रकम देने का आदेश दिया था। लेकिन तब सीसीएल प्रबंधन उस राशि को देने पर राजी नहीं हुआ। बाद में मामला काफी खींचता चला गया और 16 सितंबर 2025 को रामगढ़ कोर्ट ने कुल रकम ब्याज के साथ 87.43 लाख कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद सीसीएल प्रबंधन ने रकम कोर्ट में जमा नहीं की। इसके बाद 19 मई 2026 को कोर्ट ने रामगढ़ डीसी की चल संपत्ति की कुर्क का आदेश दे दिया।

कोर्ट ने 19 मई को सबसे पुराने वाद में फैसला सुनाया था। यह आदेश लैंड रेफरेंस केस संख्या 26/1986 और संबंधित लैंड एक्विजिशन एग्जीक्यूशन केस में पारित किया गया था। यह ममला लैंड एक्विजिशन एग्जीक्यूशन के मामले में रामगढ़ न्याय मंडल का सबसे पुराना वाद है। अदालत के अनुसार वर्ष 2004 में पारित अवार्ड के तहत अवार्ड धारक याचिकाकर्ता को भुगतान किया जाना था। इसमें मूल मुआवजा राशि और 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज शामिल है। न्यायालय ने कहा कि अब तक कुल 87,43,824.73 का भुगतान नहीं किया गया है।

सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने सीसीएल को यह सुझाव भी दिया कि कोर्ट में राशि जमा करते समय यह शर्त जोड़ी जाए कि यदि भविष्य में झारखंड हाईकोर्ट से ग्रामीणों के खिलाफ फैसला आता है तो भुगतान की गई राशि वापस ली जा सकेगी।

अब संभावना जताई जा रही है कि 25 मई से पहले सीसीएल प्रबंधन पूरी राशि अदालत में जमा कर देगा, जिससे दो दशक से अधिक समय से लंबित यह मामला सुलझने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।

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