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kolhan University News : अब कॉलेजों के इंटरमीडिएट फंड पर केयू की नजर, मांगा गया 10 वर्षों का ब्योरा

कॉलेजों के पास इस मद में जो भी पैसे हैं वे इंटरमीडिएट के छात्रों से ली गई फीस के है और इंटर कोर्स संचालन की अनुमति जैक की ओर से ही दी गई थी। ऐसे में जो पैसे बचे हैं उसे जैक या माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को मिलना चाहिए।

by Dr. Brajesh Mishra
Kolhan University inter fund
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Jamshedpur : कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) प्रशासन ने अपने सभी अंगीभूत महाविद्यालयों से पिछले दस वित्तीय वर्षों में इंटरमीडिएट फंड की स्थिति का विस्तृत ब्योरा मांगा है। इस संबंध में कुलसचिव कार्यालय की ओर से जारी पत्र में सभी प्राचार्यों और प्रभारी प्राचार्यों को सात कार्यदिवस के अंदर आवश्यक दस्तावेजों सहित रिपोर्ट जमा करने का सख्त निर्देश दिया गया है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि अब अंगीभूत कॉलेजों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी तरह बंद हो चुकी है। ऐसे में बीते वर्षों में प्राप्त और खर्च किए गए फंड का पूरा हिसाब-किताब स्पष्ट करना जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने एक निर्धारित प्रारूप भी जारी किया है, जिसमें कॉलेजों को वित्तीय वर्षवार आय, व्यय और बैंक खातों में उपलब्ध शेष राशि का विवरण देना होगा।

निर्देश में यह भी कहा गया है कि सभी संबंधित अभिलेख, जैसे बैंक स्टेटमेंट, रसीदें और व्यय से जुड़े दस्तावेज अनिवार्य रूप से संलग्न किए जाएं। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रक्रिया से वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका कम होगी। जमशेदपुर सहित पूरे क्षेत्र के महाविद्यालयों में इस निर्देश को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और समय सीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि विवि जिस फंड की जानकारी मांग रहा है उस मद में एक रुपए भी कॉलेजों को कहीं नहीं दिया है।

कॉलेजों में बंद हो चुकी है इंटर की पढ़ाई

डिग्री कॉलेजों की बात करें तो पहले यहां यूजी पीजी के साथ ही इंटर की पढ़ाई भी होती थी। लेकिन 2025 में सरकार ने कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई को पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बाद ही विवि ने कॉलेजों से इंटर फंड की जानकारी मांगी हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि इंटर के फंड की जानकारी नियमत: जैक या माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को मांगनी चाहिए। क्योंकि कॉलेजों के पास इस मद में जो भी पैसे हैं वे इंटरमीडिएट के छात्रों से ली गई फीस के है और इंटर कोर्स संचालन की अनुमति जैक की ओर से ही दी गई थी। ऐसे में जो पैसे बचे हैं उसे जैक या माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को मिलना चाहिए।

कॉलेजों के खाते में दो करोड़ रुपए तक हैं जमा

कॉलेजों के इंटरमीडिएट फंड पर विवि की नजर की मुख्य वजह मोटी रकम है। मिली जानकारी के अनुसार जितने भी बड़े कॉलेज हैं उनके इंटरमीडिएट के खाते में 1 से 2 करोड़ रुपए तक की राशि इंटरमीडिएट बंद होने के बाद तक जमा है। इसमें सबसे अधिक राशि, कोऑपरेटिव कॉलेज, घाटशिला कॉलेज, एलबीएसएम कॉलेज, एबीएम कॉलेज, ग्रेजुएट कॉलेज, वर्कर्स कॉलेज, बहरागोड़ा कॉलेज में है। जिसे अब विवि वापस लेना चाह रहा है।

कॉलेज इंटर के छात्रों से इस मद में लेते थे राशि

एडमिशन शुल्क, ट्यूशन शुल्क, रजिस्ट्रेशन व परीक्षा शुल्क, प्रायोगिक परीक्षा शुल्क

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