रांची : झारखंड प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों, पहाड़ों, जंगलों, जलाशयों और समृद्ध आदिवासी-सांस्कृतिक विरासत से संपन्न राज्य है। बावजूद इसके, लंबे समय तक राज्य को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में वह पहचान नहीं मिल सकी, जबकि इसमें अपार संभावनाएं हैं। अब राज्य सरकार पर्यटन के क्षेत्र में होलिस्टिक एप्रोच यानी समग्र बदलाव की रणनीति पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य केवल पर्यटन स्थलों का विकास करना नहीं, बल्कि डिजिटल प्रचार, आधारभूत संरचना, पर्यटक सुविधाओं, सड़क संपर्क, स्थानीय कला-संस्कृति, ईको-टूरिज्म और निजी निवेश को जोड़ते हुए पूरे पर्यटन ईकोसिस्टम को मजबूत बनाना है। इस संबंध में झारखंड के पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने राज्य की पर्यटन नीति, नई योजनाओं और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।
प्रश्न : झारखंड को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए सरकार की मुख्य रणनीति क्या है?
हमारा मानना है कि प्रकृति ने झारखंड को जितनी खूबसूरती और संभावनाएं दी हैं, उतनी बहुत कम राज्यों को मिली हैं। यहां के जलप्रपात, जंगल, पहाड़, घाटियां, जलाशय और सांस्कृतिक विरासत किसी भी पर्यटक को आकर्षित कर सकते हैं। लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि देश के लोगों तक इन स्थलों की जानकारी और उनकी वास्तविक खूबसूरती पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच सकी।
इसीलिए हमने पर्यटन विकास के लिए एक होलिस्टिक एप्रोच अपनाई है। हमारा उद्देश्य केवल एक-दो पर्यटन स्थलों का विकास नहीं, बल्कि पूरे पर्यटन तंत्र को मजबूत करना है। सबसे पहले हमने यह महसूस किया कि झारखंड की पर्यटन संभावनाओं को देश और दुनिया के सामने लाना होगा। आज के दौर में लोग सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही पर्यटन स्थलों की जानकारी प्राप्त करते हैं। इसलिए हमने डिजिटल विजिबिलिटी को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

प्रश्न : डिजिटल प्रचार और सोशल मीडिया के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए क्या पहल की गई है?
हमने पहली बार बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन प्रचार अभियान से जोड़ा है। लगभग 100 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के साथ मिलकर राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेंगे और वहां की खूबसूरती को वीडियो, रील्स और अन्य डिजिटल सामग्री के माध्यम से देशभर के लोगों तक पहुंचाएंगे।
हमारा मानना है कि यदि झारखंड की वास्तविक तस्वीर लोगों के सामने पहुंचेगी तो बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आने के लिए प्रेरित होंगे। आज पर्यटन उद्योग में डिजिटल मार्केटिंग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है और हम उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
प्रश्न : आपने कई बार ‘होलिस्टिक बदलाव’ की बात कही है। पर्यटन के संदर्भ में इसका क्या अर्थ है?
होलिस्टिक बदलाव का मतलब है कि पर्यटन विकास को केवल एक पहलू तक सीमित न रखा जाए। यदि किसी पर्यटन स्थल तक अच्छी सड़क नहीं है, वहां साफ-सफाई नहीं है, पार्किंग की सुविधा नहीं है, पर्यटक को आवश्यक जानकारी नहीं मिलती या वहां ठहरने की व्यवस्था नहीं है, तो केवल प्राकृतिक सुंदरता के भरोसे पर्यटन विकसित नहीं हो सकता।
इसलिए हमारी रणनीति में डिजिटल प्रचार, आधारभूत संरचना, पर्यटन स्थलों का प्रबंधन, सड़क संपर्क, स्थानीय संस्कृति, पर्यटक सुविधाएं, निवेश और रोजगार—सभी को एक साथ जोड़ा गया है। हम पर्यटन के पूरे ईकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यही हमारी होलिस्टिक एप्रोच है।
प्रश्न : झारखंड में पर्यटन सीजन सीमित माना जाता है। इसे बढ़ाने के लिए सरकार क्या कर रही है?
जब हमने पर्यटन विभाग की समीक्षा की, तो पाया कि झारखंड में पर्यटन गतिविधियां मुख्य रूप से अक्टूबर से फरवरी तक ही केंद्रित रहती हैं। यानी लगभग पांच महीने का ही पर्यटन सीजन होता है। ऐसे में देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों का बड़ा हिस्सा अन्य राज्यों की ओर चला जाता है।
हमने इस सोच को बदलने का प्रयास किया है। हमारी कोशिश है कि झारखंड को देश का सबसे सुरक्षित मानसून पर्यटन गंतव्य बनाया जाए। झारखंड एक पठारी राज्य है। यहां बारिश के मौसम में न तो भूस्खलन की समस्या होती है और न ही बड़े पैमाने पर बाढ़ के कारण सड़कें बंद होती हैं।
मानसून के दौरान हमारे झरने अपने पूरे वेग और खूबसूरती के साथ दिखाई देते हैं। जंगलों की हरियाली, जलाशयों का सौंदर्य और प्राकृतिक दृश्य अद्भुत होते हैं। हम देशभर के पर्यटकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि यदि वे सुरक्षित और खूबसूरत मानसून पर्यटन का अनुभव करना चाहते हैं तो झारखंड उनके लिए सबसे बेहतर विकल्पों में से एक है।
यदि हम इसमें सफल होते हैं तो राज्य का पर्यटन सीजन जुलाई से फरवरी तक विस्तारित हो जाएगा, जिससे पर्यटन क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा।
प्रश्न : पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं और प्रबंधन को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं?
हमने महसूस किया कि राज्य के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था नहीं थी। साफ-सफाई, पार्किंग, पर्यटक सुविधाओं के रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं के लिए कोई स्थायी तंत्र नहीं था।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने झारखंड पर्यटन क्षेत्र प्रबंधन की व्यवस्था बनाई है। यह संस्था पर्यटन स्थलों पर स्थानीय प्रशासन की तरह काम करेगी। इसके तहत साफ-सफाई की व्यवस्था, पार्किंग प्रबंधन, उपयोगकर्ता शुल्क निर्धारण, पर्यटक सुविधाओं का रखरखाव और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
हम चाहते हैं कि झारखंड आने वाले पर्यटकों को हर स्तर पर बेहतर अनुभव मिले।
प्रश्न : पर्यटन स्थलों तक पहुंच को आसान बनाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
पर्यटन विकास के लिए बेहतर सड़क संपर्क अत्यंत आवश्यक है। हमने उन पर्यटन स्थलों की पहचान की है जहां पहुंचने में कठिनाई होती है और वहां सड़क निर्माण तथा सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पेरवाघाघ परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है और वहां सड़क निर्माण का कार्य आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा ग्रामीण कार्य विभाग, सड़क निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों के सहयोग से कई महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों तक संपर्क मार्गों को बेहतर बनाया जा रहा है।
हमारा लक्ष्य है कि पर्यटक बिना किसी परेशानी के राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक आसानी से पहुंच सकें।
प्रश्न : झारखंड की कला और संस्कृति को पर्यटन से जोड़ने के लिए क्या पहल हो रही है?
झारखंड की पहचान केवल उसके प्राकृतिक स्थलों से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी है। हम चाहते हैं कि यहां आने वाले पर्यटक झारखंड की कला, संस्कृति और परंपराओं को भी करीब से महसूस करें।
नेतरहाट घाटी में गार्डवाल पेंटिंग के माध्यम से स्थानीय कला को प्रदर्शित किया गया है। वहां आने वाले पर्यटक इसकी सराहना कर रहे हैं। इसी प्रकार का कार्य पतरातू घाटी और अन्य पर्यटन स्थलों पर भी करने की योजना है।
हम चाहते हैं कि पर्यटन स्थलों पर झारखंड की संस्कृति की महक दिखाई दे और पर्यटक यहां से केवल प्राकृतिक सौंदर्य की यादें ही नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान की छाप भी लेकर जाएं।
प्रश्न : मेघाहातुबुरू को लेकर सरकार की क्या योजना है?
मेघाहातुबुरू झारखंड के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है। इसके नाम का अर्थ ही इसकी विशेषता को दर्शाता है—मेघा यानी बादल, हातु यानी गांव और बुरू यानी पहाड़। अर्थात बादलों का गांव।
यहां साल के कई महीनों तक बादलों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। हमने इस क्षेत्र के विकास के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए हैं। अब झारखंड ईको टूरिज्म अथॉरिटी के माध्यम से यहां एक महत्वपूर्ण पर्यटन परियोजना विकसित करने की योजना है।
एक ऐसी पहाड़ी का चयन किया गया है जहां से सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। वहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त रिसॉर्ट और अन्य पर्यटन सुविधाओं के विकास की दिशा में काम चल रहा है। हमारा उद्देश्य मेघाहातुबुरू को राष्ट्रीय स्तर के ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना है।
प्रश्न : झारखंड पर्यटन के भविष्य को आप किस रूप में देखते हैं?
पर्यटन विकास एक लंबी और सतत प्रक्रिया है। यह रातों-रात होने वाला परिवर्तन नहीं है। लेकिन यदि योजनाबद्ध और समग्र तरीके से काम किया जाए तो निश्चित रूप से परिणाम सामने आते हैं।\
आज हमारी सरकार पर्यटन क्षेत्र में 360 डिग्री दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है। डिजिटल प्रचार, पर्यटन सीजन का विस्तार, सड़क संपर्क, पर्यटक सुविधाएं, स्थानीय कला-संस्कृति का संरक्षण, ईको-टूरिज्म और निवेश को बढ़ावा देने जैसे कई मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है।
मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में झारखंड देश के पर्यटन मानचित्र पर एक मजबूत और विशिष्ट पहचान बनाएगा। इससे न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्व-रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। हमारा लक्ष्य झारखंड को ऐसा पर्यटन मॉडल बनाना है, जहां विकास, प्रकृति और संस्कृति एक साथ आगे बढ़ें।
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