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RANCHI NEWS: सड़कों पर आवारा जानवरों का आतंक, लोगों का बढ़ा रहे सिर दर्द

आवारा जानवरों की वजह से आए दिन शहर में हो रही दुर्घटनाएं, रांची नगर निगम की फाइलों में ही घूम रहे नियम कानून

by Vivek Sharma
रांची की सड़कों पर आवारा जानवर
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RANCHI: राजधानी रांची की सड़कों पर आवारा जानवरों का आतंक है। मुख्य सड़कों पर बढ़ती इनकी संख्या अब आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। शहर के लगभग हर प्रमुख सड़क, चौक-चौराहे और गलियों में आवारा मवेशी और कुत्ते खुलेआम घूमते नजर आते हैं। इनके कारण न केवल यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि आए दिन सड़क दुर्घटना में लोग घायल हो रहे हैं। इसके बावजूद समस्या के समाधान के लिए रांची नगर निगम कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। निगम की यह योजना केवल फाइलों में ही घूम रही है।

बीच सड़क में बिगड़ रहा बैलेंस


स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन हो या रात आवारा जानवर सड़क के बीचों-बीच बैठे या घूमते दिखाई देते हैं। कई बार अचानक सड़क पर आने की वजह से वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। वहीं आवारा कुत्तों के झुंड रोड पर चलने वाले और बच्चों के लिए भी खतरा बने हुए हैं। डॉग बाइट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और लोग इलाज के लिए अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।

11 साल पहले बनाई गई थी टीम

जानकारी के अनुसार रांची नगर निगम ने करीब तीन साल पहले आवारा जानवरों को पकड़ने और उनका डाटा तैयार करने के लिए कैटल कैचिंग टीम का गठन किया था। तत्कालीन स्वास्थ्य पदाधिकारी के नेतृत्व में बनी इस टीम में कई कर्मचारियों को शामिल किया गया था। हालांकि उस समय टीम न तो किसी आवारा जानवर को पकड़ सकी और न ही शहर में मौजूद ऐसे जानवरों का कोई रिकॉर्ड तैयार कर पाई। वर्तमान स्थिति यह है कि नगर निगम के पास शहर में मौजूद आवारा जानवरों को लेकर कोई प्लान तक नहीं है।

राजधानी में नहीं है कांजी हाउस

समस्या का एक बड़ा कारण निगम के पास कांजी हाउस (पशु आश्रय केंद्र) का नहीं होना भी है। वर्ष 2011 में चलाए गए कैटल कैचिंग अभियान के दौरान पकड़े गए पशुओं को अस्थायी रूप से अपर बाजार स्थित निगम के स्टोर में रखा गया था। इसके बाद से न तो बड़े स्तर पर कोई अभियान चलाया गया और न ही पशुओं को रखने के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित की गई। जबकि शहर के कांटाटोली, अपर बाजार, रातू रोड, बरियातू, कोकर, चुटिया, बहू बाजार, मेन रोड और डोरंडा जैसे क्षेत्रों में यह समस्या सबसे अधिक गंभीर है। इन इलाकों में सड़कें ही नहीं, बल्कि गलियां भी आवारा जानवरों का ठिकाना बन चुकी हैं। इसके अलावा ये जानवर सड़कों पर कचरा फैलाकर स्वच्छता को भी प्रभावित कर रहे हैं। इस मामले नगर आयुक्त सुशांत गौरव से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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