Jamshedpur : न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, जमशेदपुर की अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए साफ किया है कि किसी आपराधिक मामले के अभियुक्त के विरुद्ध धारा 82 सीआरपीसी के तहत की जाने वाली उद्घोषणा (प्रोक्लेमेशन) या कुर्की की कार्रवाई उस संपत्ति पर नहीं की जा सकती, जिसका स्वामित्व किसी निर्दोष तृतीय पक्ष के पास हो।
मामले में याचिकाकर्ता सुनील सिंह की ओर से न्यायालय को बताया गया कि दयाल सिटी, छोटा गोविंदपुर स्थित डुप्लेक्स संख्या एस-92 उनके पुत्र विकास कुमार सिंह द्वारा विधिवत पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से खरीदी गई संपत्ति है। इस संपत्ति का मानगो थाना कांड के अभियुक्त से कोई संबंध नहीं है। साथ ही याचिकाकर्ता के परिवार का उक्त मकान पर वैध एवं शांतिपूर्ण कब्जा है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने जिला अवर निबंधक, जमशेदपुर से रिपोर्ट मंगाई। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि संबंधित संपत्ति का विधिसम्मत निबंधन विकास कुमार सिंह के नाम पर किया गया है। उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने माना कि विकास कुमार सिंह उक्त संपत्ति के वैध स्वामी हैं तथा अभियुक्त के विरुद्ध जारी उद्घोषणा की कार्रवाई इस संपत्ति पर लागू नहीं होती।
इसके बाद अदालत ने संबंधित परिसर पर धारा 82 के तहत चस्पा किए गए उद्घोषणा नोटिस को हटाने और संबंधित थाना को उक्त कार्रवाई वापस लेने का निर्देश दिया।
कानूनी जानकारों के अनुसार, यह आदेश वैध संपत्ति स्वामित्व के अधिकारों की रक्षा तथा निर्दोष व्यक्तियों को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से संरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। मामले में याचिकाकर्ता सुनील सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद कुमार अग्रवाल के साथ अधिवक्ता कमल अग्रवाल एवं आभा रानी ने प्रभावी पैरवी की।
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