रांची: झारखंड की सियासत और कानूनी गलियारों से बड़ी सूचना सामने आई है। राज्य के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) राजीव रंजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, उनके इस्तीफे के कारणों को लेकर अभी तक सरकार या महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
फरवरी 2020 से संभाल रहे थे महाधिवक्ता का दायित्व
राजीव रंजन को फरवरी 2020 में झारखंड का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था। महाधिवक्ता राज्य सरकार के सर्वोच्च विधिक सलाहकार होते हैं और उच्च न्यायालय सहित विभिन्न न्यायिक मंचों पर सरकार का पक्ष रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान राजीव रंजन ने राज्य सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों में पैरवी की। संवैधानिक मुद्दों, प्रशासनिक मामलों और जनहित याचिकाओं से जुड़े अनेक मामलों में उन्होंने सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से रखा।
कई अहम मामलों में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
महाधिवक्ता के रूप में राजीव रंजन की भूमिका राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण रही है। झारखंड उच्च न्यायालय में सरकार से जुड़े कई बड़े मामलों में वे प्रमुख कानूनी प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रहे। हाल के वर्षों में राज्य सरकार और विभिन्न विभागों से जुड़े अनेक कानूनी विवादों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, महाधिवक्ता का पद राज्य की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि सरकार की नीतियों और फैसलों का कानूनी पक्ष न्यायालय में इसी पद के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।

