जमशेदपुर : सत्यानंद योग केंद्र द्वारा गोलमुरी क्लब में आयोजित विशेष योग शिविर के दूसरे दिन 80 साधकों ने योग एवं ध्यान की गहन साधनाओं का अभ्यास किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक शांति पाठ एवं ‘ॐ’ के गुंजन से हुआ, जिसके पश्चात स्वामी जी ने साधकों को कायास्थैर्यम् (शारीरिक स्थिरता) का अभ्यास कराया।
स्वामी जी ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है। यदि योगाभ्यास के बावजूद व्यक्ति के व्यवहार, सोच और संबंधों में सौहार्द नहीं आता, तो योग की वास्तविक भावना अधूरी रह जाती है। एक सच्चे योग साधक की पहचान उसके शांत, संतुलित एवं सौम्य आचरण से होती है।
ध्यान सत्र में स्वामी जी ने ध्यान की वैज्ञानिक एवं क्रमिक प्रक्रिया समझाई। साधकों को शरीर को पूर्णतः स्थिर एवं तनावमुक्त कर उसके प्रति सजगता विकसित करने, श्वास एवं प्राण प्रवाह का अवलोकन करने तथा विचारों को द्रष्टा भाव से देखने का अभ्यास कराया गया। अंत में चेतना को भ्रूमध्य में केंद्रित कर अंतर्ज्योति के सहज दर्शन की प्रक्रिया कराई गई।
व्यावहारिक सत्र में उष्ट्रासन एवं शशांकासन का अभ्यास कराया गया। प्राणायाम में नाड़ी शोधन, शीतली, शीतकारी एवं भ्रामरी का अभ्यास हुआ, जबकि ध्यान सत्र में अंतर्मौन के छह स्तरों का क्रमिक अभ्यास संपन्न कराया गया।
80 साधकों की गरिमामयी उपस्थिति में शिविर का द्वितीय दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आयोजन को सफल बनाने में मलय डे,अश्विनी शुक्ला, राज शर्मा, प्रिंस अग्रवाल तथा मनोज झा का विशेष योगदान रहा।
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