
रांची : झारखंड सरकार ने समाहरणालय लिपिकीय संवर्ग (भर्ती, प्रोन्नति एवं अन्य सेवा शर्तें) नियमावली-2026 में नया प्रावधान जोड़ा है। नई नियमावली में वर्षों से संविदा, दैनिक वेतन, एकमुश्त पारिश्रमिक अथवा आउटसोर्सिंग (बाह्य स्रोत) के माध्यम से समाहरणालयों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को बड़ी राहत दी गई है। सरकार ने पहली सीधी भर्ती में इन्हें आयुसीमा में विशेष छूट और कार्य-अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक (वेटेज) देने का प्रावधान किया है। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।
नई व्यवस्था के तहत संविदा या आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को एकमुश्त (वन-टाइम) विशेष छूट मिलेगी। जितने वर्षों तक उन्होंने कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में सेवा दी है, उतने वर्षों की आयुसीमा में छूट दी जाएगी। हालांकि, किसी भी अभ्यर्थी की अधिकतम आयु 50 वर्ष से अधिक नहीं हो सकेगी।
इसके अलावा, जिन कंप्यूटर ऑपरेटरों ने तीन वर्ष (36 माह) से अधिक सेवा दी है, उन्हें नियुक्ति की प्रतियोगी परीक्षा में कार्य-अनुभव का लाभ मिलेगा। 36 माह तक की सेवा पर कोई अतिरिक्त अंक नहीं मिलेगा, लेकिन इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त माह की सेवा पर 0.15 प्रतिशत अतिरिक्त अंक जोड़े जाएंगे। यह वेटेज अधिकतम 15 प्रतिशत तक सीमित रहेगा।
कार्य-अनुभव का प्रमाणपत्र संबंधित विभाग जारी करेगा
कार्य-अनुभव का प्रमाणपत्र संबंधित विभाग या कार्यालय प्रधान द्वारा जारी किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयुसीमा में छूट और अनुभव का वेटेज केवल पहली नियुक्ति प्रक्रिया के लिए मान्य होगा। भविष्य की भर्तियों में इसे आधार नहीं बनाया जाएगा।
नियमावली में भर्ती प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को रिक्तियों की गणना होगी। कुल रिक्तियों में 85 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से और 15 प्रतिशत पद समूह ‘घ’ के कर्मियों की सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से भरे जाएंगे। सभी जिलों से प्राप्त रिक्तियों को समेकित कर राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, कार्मिक विभाग के माध्यम से चयन आयोग को अधियाचना भेजेगा। नियुक्ति और प्रोन्नति में राज्य सरकार की आरक्षण नीति और रोस्टर प्रणाली लागू रहेगी।
इस नई नियमावली से लंबे समय से समाहरणालयों में संविदा और आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियमित नियुक्ति की दौड़ में महत्वपूर्ण बढ़त मिलने की उम्मीद है। विशेषकर आयुसीमा पार कर चुके या उसके करीब पहुंच चुके कर्मचारियों के लिए यह प्रावधान सबसे बड़ी राहत माना जा रहा है।

