
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर में चल रहे ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को भव्य शोभायात्रा के साथ मौसीबाड़ी स्थित गुंडिचा मंदिर पहुंचाया गया। भजन-कीर्तन और “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से पूरा शहर भक्तिमय हो उठा।
रथ को खींचते हुए पहुंचे श्रद्धालु
करीब 300 साल पुरानी परंपरा के अनुसार गुरुवार को पुरानीबस्ती स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से रथयात्रा शुरू हुई थी। पहले दिन रथ को बड़दांडो मार्ग पर भाजपा नेता अशोक सारंगी के आवास के पास रात्रि विश्राम के लिए रोका गया था। शुक्रवार शाम पुनः यात्रा निकली और तीनों देवों को सजाए गए रथ पर बैठाकर मौसीबाड़ी ले जाया गया।रास्ते भर श्रद्धालु रथ खींचते नजर आए। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर लोगों ने प्रभु का स्वागत किया। गुंडिचा मंदिर पहुंचने पर विशेष आरती और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
सात दिनों तक मौसीबाड़ी में विराजेंगे भगवान
मंदिर के मुख्य पुजारी मुरारी मोहन मिश्र ने बताया कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अब सात दिनों तक मौसीबाड़ी में विराजेंगे। इस अवधि में रोजाना विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और महाप्रसाद वितरण होगा। निर्धारित समय पूरा होने के बाद देवों को पुनः रथ पर विराजमान कर श्री जगन्नाथ मंदिर वापस लाया जाएगा।
300 साल पुरानी परंपरा
चक्रधरपुर की यह रथयात्रा जिले की सबसे प्राचीन और भव्य यात्राओं में गिनी जाती है। मान्यता है कि इसकी शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई। इतिहासकारों के अनुसार 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नायक पोड़ाहाट राजवंश के राजा अर्जुन सिंह भगवान जगन्नाथ के परम भक्त थे। बाद में उन्होंने सेवा-पूजा की जिम्मेदारी मिश्र परिवार को सौंपी। तभी से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है।
रथयात्रा को लेकर चक्रधरपुर और आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। चारों ओर मेले जैसा माहौल दिखा। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के कारण यह आयोजन अब पूरे पश्चिमी सिंहभूम की पहचान बन गया है।

