
रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से पहले राज्य सरकार झारखंड लोक सेवा आयोग को नया अध्यक्ष देने की तैयारी में है। सरकार की कोशिश है कि किसी ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारी को यह कमान सौंपी जाए जिसकी छवि पूरी तरह बेदाग, ईमानदार और कड़क अफसर की रही हो।
नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा के अलावा भारतीय पुलिस सेवा या भारतीय वन सेवा के पूर्व अफसरों के नामों पर भी विचार किया जा रहा है। आयोग में पहले भी इन सेवाओं के रिटायर्ड अधिकारी अध्यक्ष रह चुके हैं। फिलहाल, शीर्ष स्तर पर इस नाम को तय करने के लिए मंथन चल रहा है।
सरकार जल्द से जल्द यह नियुक्ति इसलिए भी करना चाहती है ताकि आगामी विधानसभा सत्र में विपक्ष को JPSC में खाली पड़े अध्यक्ष पद को लेकर घेरने का मौका न मिले। 21 जुलाई को एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद से यह पद खाली पड़ा है।
झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा और अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में हुई कथित धांधलियों को लेकर पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया था।
सीआईडी ने ख्यांगते के आवास और जेपीएससी दफ्तर स्थित उनके कमरे में करीब पांच घंटे तक छापेमारी की थी। इस दौरान कई अहम दस्तावेज, कंप्यूटर डेटा और ओएमआर शीट जब्त किए गए थे। एल. ख्यांगते ने मार्च 2025 में पद संभाला था। जुलाई 2026 में छापेमारी के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
अध्यक्ष न होने की वजह से JPSC का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। आयोग ने अगस्त और सितंबर में होने वाली सात अहम परीक्षाओं को टाल दिया है। अब नए अध्यक्ष के आने के बाद ही इन परीक्षाओं की नई तारीखें तय होंगी और नई भर्तियों की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि मानसून सत्र से पहले होने वाली कैबिनेट बैठक में नए अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग सकती है।
अगर नियुक्ति में थोड़ा वक्त लगता है, तो वर्तमान में कार्यरत तीन सदस्यों (अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा या जमाल अहमद) में से किसी एक को अस्थायी तौर पर कमान दी जा सकती है।
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