
Palamu : कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद पलामू के अपराध जगत के एक लंबे और खौफनाक अध्याय का अंत माना जा रहा है। करीब दो दशक तक रंगदारी, गैंगवार और संगठित अपराध के जरिए दहशत फैलाने वाले सुजीत सिन्हा की मौत ने उस दौर की यादें फिर ताजा कर दी हैं, जब हुसैनाबाद का जपला क्षेत्र अपराधियों के गढ़ के रूप में जाना जाता था।
मरहा-पथरा गांव का रहने वाला सुजीत सिन्हा अपराध की दुनिया में धीरे-धीरे इतना प्रभावशाली हो गया था कि उसका नाम पलामू के सबसे कुख्यात अपराधियों में शुमार होने लगा। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, बमबाजी और टेंडर विवाद सहित कई गंभीर मामले दर्ज थे।
रिक्शा चालक की हत्या से शुरू हुआ था आपराधिक सफर
सुजीत सिन्हा पहली बार वर्ष 2005 में चर्चा में आया, जब मेदिनीनगर के सेवासदन इलाके में मामूली विवाद के बाद उसने कथित तौर पर रिक्शा चालक कृष्णा साव की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद उसने तेजी से अपना आपराधिक नेटवर्क खड़ा किया और पलामू में रंगदारी व गैंगवार का बड़ा चेहरा बन गया।
दोहरे हत्याकांड के बाद पूरे राज्य में हुआ कुख्यात
वर्ष 2007 में कांदू मोहल्ले में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड ने सुजीत सिन्हा को राज्यभर में कुख्यात बना दिया। इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई थी। इसके बावजूद लंबे समय तक उसका गिरोह सक्रिय रहा। बताया जाता है कि केवल पलामू जिले में ही उसके खिलाफ 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे।
अपराध की छाया परिवार पर भी पड़ी
लगातार पुलिस कार्रवाई और छापेमारी का असर उसके परिवार पर भी पड़ा। उसकी मां, भाई और बहन को मेदिनीनगर छोड़कर रायपुर जाना पड़ा। वहीं उसकी पत्नी रिया सिन्हा भी विभिन्न आपराधिक मामलों में जेल में बंद है। अपराध की दुनिया में खड़ा किया गया उसका साम्राज्य अंततः उसके परिवार के लिए भी भारी साबित हुआ।
कभी बदनाम था जपला, अब बदल रही है पहचान
एक समय ऐसा था जब जपला का नाम सुनते ही लोग सतर्क हो जाते थे। यहां तक कि इस क्षेत्र के छात्रों को दूसरे शहरों में किराये का मकान लेने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई छात्र अपनी पहचान और स्थायी पता तक छिपाने को मजबूर हो जाते थे, क्योंकि जपला की छवि अपराध प्रभावित इलाके की बन चुकी थी।
हालांकि समय के साथ हालात बदले हैं। आज हुसैनाबाद-जपला क्षेत्र शिक्षा, व्यापार और विकास की नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में सुजीत सिन्हा का एनकाउंटर केवल एक अपराधी का अंत नहीं, बल्कि पलामू के उस दौर के समापन का प्रतीक भी माना जा रहा है, जब यह इलाका रंगदारी और अपराध के लिए बदनाम था।

