
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के सदर अस्पताल चाईबासा में एक बार फिर भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि एक गरीब परिवार से प्रसव कराने के बदले 1500 रुपये की अवैध वसूली की गई। शिकायत सामने आते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
डिलीवरी के नाम पर 500 वसूली, ब्लड के नाम पर 5000 तक वसूली
रघुनाथपुर गांव की बासमती सवैया ने बताया कि उन्होंने 15 अगस्त को एक महिला को डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था। 16 अगस्त को नर्सों ने बताया कि बेटा हुआ है। इसके बाद काउंटर पर बैठी महिला ने पैसे मांगे। पहले 100 रुपये दिए, लेकिन वह नहीं मानी। अंत में 500 रुपये देने पड़े।
उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ प्रसव ही नहीं, रक्त की व्यवस्था के नाम पर भी मरीजों से मोटी रकम ली जा रही जा रही है। किसी से 3000 रुपये तो किसी से 5000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इस पूरे गोरखधंधे में अस्पताल कर्मी और दलाल दोनों शामिल हैं। एक और महिला से ₹1500 डिलीवरी के नाम पर लिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच में जो भी कर्मचारी या बाहरी लोग दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
सिविल सर्जन ने कहा कि राज्य सरकार और उपायुक्त मनीष कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी और मुफ्त बनाने का काम चल रहा है। रिश्वतखोरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी।
इस घटना के बाद निजी नर्सिंग होम और अस्पताल के आसपास सक्रिय दलालों पर भी प्रशासन की नजर टेढ़ी हो गई है। आरोप है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले सीधे-साधे मरीजों को बहला-फुसलाकर ब्लड बैंक और इमरजेंसी सेवा के नाम पर उनसे हजारों रुपये ऐंठे जाते हैं।
अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और गरीब मरीजों को सरकारी योजना का लाभ बिना रुकावट कब तक मिल पाएगा।
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