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Jamshedpur Flood News : जमशेदपुर में फिर बाढ़, डूबे मानगो के जाबिर पुल की बह गई रेलिंग, खतरे के निशान से 1.95 मीटर ऊपर खरकई नदी, स्वर्णरेखा भी उफान पर

ओडिशा स्थित ब्यांगबिल व खरकई डैम के साथ ही खोल दिए गए हैं चांडिल डैम व गाजिया बैराज के फाटक

by Mujtaba Haider Rizvi
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Jamshedpur: लगातार हो रही बारिश और ऊपरी जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में एक बार फिर बाढ़ जैसे हालात हैं। शहर के बागबेड़ा, जुगसलाई, शास्त्री नगर और मानगो के नदी किनारे के इलाके डूब गए हैं। मानगो को कपाली से जोड़ने वाला जाबिर पुल डूब गया है। यही नहीं, इसकी रेलिंग भी बह गई है।

शहर के निचले इलाकों और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में प्रशासन की नजर बनी हुई है। शास्त्रीनगर, कदमा, बागबेड़ा नया बस्ती, बड़ौदा घाट, जुगसलाई और भुइयांडीह समेत कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति है । वहीं, ओडिशा में हुई भारी बारिश के बाद ब्यांगबिल और खरकई डैम से पानी छोड़े जाने से नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
खरकई नदी का खतरे का निशान 129 मीटर है। यह नदी सोमवार की रात 8 बजे लाल निशान से 1.95 मीटर ऊपर बह रही है। यह नदी अभी 130.95 मीटर के जल स्तर पर बह रही है।

दोपहर को यह नदी 130.44 मीटर पर बह रही है। यानि, यह नदी सोमवार को दोपहर 12 बजे तक खतरे के निशान से 1.44 मीटर ऊपर बह रही थी। जबकि, स्वर्णरेखा नदी का खतरे का निशान 121.50 है। यह नदी खतरे के निशान से नीचे 120.24 मीटर पर बह रही थी। हालांकि, दोनों नदियों में लगातार जल स्तर ऊपर उठ रहा है।

स्वर्णरेखा भवन, आदित्यपुर स्थित फ्लड सेल की ओर से 31 अगस्त की सुबह आठ बजे खरकई नदी आदित्यपुर ब्रिज के पास खतरे के निशान को पार कर गई थी। यहां नदी का जलस्तर 129.03 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 129 मीटर है। इस तरह सुबह खरकई नदी खतरे के निशान से 0.03 मीटर ऊपर बह रही थी।

सुवर्णरेखा नदी उफान पर

मानगो ब्रिज के पास सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर सोमवार की रात 120.80 मीटर पर बह रही है। दोपहर को इस नदी का जल स्तर 119.70 मीटर दर्ज किया गया था। यहां खतरे का निशान 121.50 मीटर निर्धारित है। फिलहाल सुवर्णरेखा नदी सुबह खतरे के निशान से 1.80 मीटर नीचे बह रही थी। हालांकि, लगातार बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण इसके जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है।

ब्यांगबिल और खरकई डैम से पानी का डिस्चार्ज

रिपोर्ट के मुताबिक ओडिशा में 76 मिलीमीटर बारिश के बाद ब्यांगबिल डैम से 84.72 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं, 72 मिलीमीटर बारिश के बाद खरकई डैम से 55.18 क्यूमेक्स पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। इससे खरकई नदी के जलस्तर पर दबाव बढ़ रहा है। गाजिया बैराज की स्थिति भी प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सुबह आठ बजे यहां जलस्तर 135 मीटर दर्ज किया गया और इसमें बढ़ोतरी जारी थी। जलस्तर के दबाव को देखते हुए बराज के सभी आठ गेट खोल दिए गए हैं। इन गेटों से करीब 1186.54 क्यूमेक्स पानी खरकई नदी में छोड़ा जा रहा है।

चांडिल डैम और गालूडीह बैराज से भी छोड़ा जा रहा पानी

चांडिल डैम का जलस्तर सुबह आठ बजे 179.19 मीटर दर्ज किया गया। डैम के 13 रेडियल गेट और स्लुइस के जरिए नदी और नहर में कुल 744.57 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं, गालूडीह बैराज के छह स्पिलवे गेट खोलकर सुवर्णरेखा नदी में 1633.36 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। बैराज से नहरों में पानी की आपूर्ति फिलहाल पूरी तरह बंद रखी गई है।

निचले इलाकों में प्रशासन की नजर

लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन और राहत-बचाव दल को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की गई है। प्रशासन की ओर से लोगों से सतर्क रहने और नदी एवं जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की जा सकती है।

बागबेड़ा में स्लुइस गेट लगाने की मांग

गौरतलब है कि बागबेड़ा के नया बस्ती इलाके के 10 घरों में पानाी भर गया है। पानी बागबेड़ा इलाके में भर रहा है। बागबेड़ा के भाजपा नेता सुबोध झा का कहना है कि जब तक बागबेड़ा में स्लुइस गेट नहीं बनाया जाता तब तक बागबेड़ा को बाढ़ से बचाना नामुमकिन है। उनकी मांग है कि बागबेड़ा में एक स्लुइस गेट लगाया जाए। उन्होंने बताया कि पहले यहां एक स्लुइस गेट लगाया गया था। इसके बाद नदी का पानी तो बागबेड़ा में नहीं घुस पाता था। लेकिन, बरसात का पानी नहीं निकल पाने की वजह से कई घर डूब जाते थे। इस पर मांग की गई थी कि स्लुइस गेट के इस पार से पानी नदी में छोड़ने के लिए दो मोटरें लगाई जाएं। इन मोटरों के जरिए बरसात और बाढ़ का पानी उस पार नदी में डाला जाता। मगर, बागबेड़ा के लोगों की यह मांग पूरी नहीं हो पाई। इसी बीच स्लुइस गेट जाम हो गया तो दो साल पहले इसे काट कर बागबेड़ा में भरा बरसात का पानी निकाला गया था। तब से यहां स्लुइस गेट नहीं है। इससे अब बाढ़ का पानी बागबेड़ा में घुस जाता है।

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