
रांची : केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि झारखंड में उद्योगों का विस्तार होने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य से होने वाले पलायन को रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को औद्योगिक विकास की दिशा में गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है। भारत सरकार के सहयोग से झारखंड में नए उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। केंद्रीय मंत्री रांची के एकदिवसीय दौरे में पत्रकारों से वार्ता करते हुए ये बातें कहीं।
अठावले ने कहा कि रोजगार के अवसर बढ़ने से झारखंड के युवाओं को काम के लिए दूसरे राज्यों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर काम करें तो झारखंड में औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है।
छात्र आंदोलन पर उठाए सवाल, नई भर्ती नीति की जरूरत बताई
छात्र आंदोलन को लेकर केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत में छात्रों से बातचीत की जानी चाहिए थी, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज कराया गया। बाद में परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया, लेकिन कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी।
उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले को गंभीरता से लेकर आगे कार्रवाई करने की जरूरत है। सरकार को परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर नई और प्रभावी नीति बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद की स्थिति नहीं बने।
शिबू सोरेन से थे अच्छे संबंध, हेमंत को बताया कम सक्रिय
राजनीतिक मुद्दों पर अठावले ने कहा कि उनके दिशोम गुरु शिबू सोरेन से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में शिबू सोरेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हालांकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर उन्होंने कहा कि वे उतने सक्रिय नहीं हैं।
अठावले ने कहा कि फिलहाल झारखंड में उनकी सरकार नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ यहां की जनता को मिल रहा है। केंद्र के सहयोग से सड़कें बनी हैं और गरीबों को राशन समेत विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में झारखंड में भी उनकी सरकार बनेगी।
जाति व्यवस्था खत्म होगी तो आरक्षण खत्म करने पर विचार
आरक्षण समाप्त करने की मांग पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सभी वर्गों को आरक्षण देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यदि जाति व्यवस्था समाप्त हो जाती है तो आरक्षण समाप्त करने के सवाल पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी वर्ग के लोगों की प्रतिभा को कम आंकना गलत है। सामान्य वर्ग और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के अंकों में कई बार बहुत कम अंतर होता है, लेकिन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण दोनों वर्गों को मिलने वाले अवसर समान नहीं होते।
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