
Jamshedpur : बच्चों में जन्मजात टेढ़े पैर (क्लबफुट/CTEV) के समय पर उपचार और प्रभावी सुधार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से टाटा मेन अस्पताल के ज्वाइंट रिप्लेसमेंट एंड ऑर्थोपेडिक्स विभाग की ओर से पोंसेटी तकनीक पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में छोटे बच्चों में क्लबफुट के शुरुआती उपचार के लिए पोंसेटी पद्धति के उपयोग, तकनीक और फॉलो-अप पर चिकित्सकीय जानकारी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन टाटा स्टील की मेडिकल सर्विसेज की जनरल मैनेजर डॉ. विनिता सिंह ने किया। शैक्षणिक एवं व्यावहारिक सत्रों का संचालन ज्वाइंट रिप्लेसमेंट एंड ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. जे. के. लायक के नेतृत्व में विभागीय टीम ने किया।
टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में पोंसेटी तकनीक के विभिन्न पहलुओं पर प्रदर्शन और चर्चा की गई। इसमें पैर को धीरे-धीरे सही स्थिति में लाने, क्रमिक प्लास्टर (सीरियल कास्टिंग), उपचार के बाद फॉलो-अप तथा क्लबफुट के दोबारा होने की रोकथाम से जुड़े विषयों को विस्तार से समझाया गया।
पोंसेटी पद्धति क्लबफुट के उपचार की व्यापक रूप से स्वीकार्य तकनीकों में शामिल है। इसमें बिना बड़े ऑपरेशन के क्रमिक रूप से पैर की स्थिति में सुधार लाने पर जोर दिया जाता है। कार्यशाला के माध्यम से चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों में इस पद्धति को लेकर जागरूकता और व्यावहारिक कौशल को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
टाटा मेन अस्पताल का उद्देश्य क्लबफुट की जल्द पहचान, समय पर उपचार और प्रभावी सुधार को बढ़ावा देना है, ताकि प्रभावित बच्चों की चलने-फिरने की क्षमता बेहतर हो और उन्हें लंबे समय तक बेहतर कार्यात्मक परिणाम मिल सकें।

