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jharkhand, National Highway, Land Acquisition : 6,700 करोड़ की एनएच परियोजनाओं में जमीन का पेंच, 262 करोड़ का मुआवजा अटका

by Nikhil Kumar
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एनएचएआई के बार-बार आग्रह के बावजूद कई परियोजनाओं में भुगतान लंबित, रैयत मुआवजे के लिए भटक रहे और निर्माण के लिए जमीन का कब्जा नहीं मिल रहा

रांची : झारखंड में करीब 6,700 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान का पेंच भारी पड़ रहा है। एनएचएआई की ओर से लंबित मुआवजा भुगतान को लेकर राज्य सरकार और संबंधित जिला प्रशासन से बार-बार कार्रवाई का आग्रह किया जा रहा है, लेकिन कई परियोजनाओं में बड़ी राशि अब भी लंबित है। इसका असर दो स्तर पर दिख रहा है। एक ओर अधिग्रहित जमीन के कई रैयतों को मुआवजे का इंतजार है और वे भुगतान के लिए संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एनएचएआई को कई स्थानों पर निर्माण के लिए जमीन का कब्जा नहीं मिल पा रहा है। लातेहार, पलामू, रामगढ़ और देवघर की परियोजनाओं में करीब 262.37 करोड़ रुपये का मुआवजा भुगतान लंबित है।

एनएच-75 के कुरू-उदयपुरा फोरलेनिंग पैकेज-1 की लागत करीब 1,275 करोड़ रुपये है। लातेहार में करीब 8.5 किमी हिस्सा प्रभावित है। कुल 134.96 करोड़ रुपये के मुआवजे में से 102.13 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। इसी एनएच-75 के उदयपुरा-भोगू पैकेज-2 की लागत करीब 1,302 करोड़ रुपये है। लातेहार में करीब 800 मीटर हिस्सा 4.81 करोड़ रुपये के लंबित मुआवजे के कारण प्रभावित है। इसके अलावा करीब 24.91 किमी हिस्से के लिए 62.27 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है।

भोगू – शंखा पैकेज-3 की लागत करीब 1,652 करोड़ रुपये है। पलामू में चियांकी, सिंगरा कला, पड़वा और राजहर में करीब 2.5 किमी हिस्सा भूमि अधिग्रहण विवाद के कारण अटका है। यहां 133.87 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि एलए कोर्ट में जमा है, लेकिन जमीन का कब्जा नहीं मिल पाया है।
बोकारो-जैना मोड़-गोला एनएच-320 परियोजना की लागत करीब 965 करोड़ रुपये है। रामगढ़ में 0.80 किमी जमीन का कब्जा मुआवजा बढ़ाने के विवाद के कारण प्रभावित है। बोकारो में 0.45 किमी जमीन से अतिक्रमण हटाया जाना बाकी है।
देवघर बाइपास परियोजना की लागत करीब 1,531 करोड़ रुपये है। यहां 219.66 करोड़ रुपये की उपलब्ध मुआवजा राशि में से 126.50 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है, जबकि 93.16 करोड़ रुपये अब भी लंबित हैं। इसके कारण करीब 9.8 किमी हिस्सा प्रभावित हो रहा है।

रैयत और परियोजना, दोनों इंतजार में

लंबित मामलों में रैयतों की परेशानी भी सामने आ रही है। अधिग्रहण की प्रक्रिया के बावजूद भुगतान नहीं होने से संबंधित रैयत मुआवजे के लिए विभागीय स्तर पर चक्कर लगा रहे हैं। दूसरी ओर, जहां राशि एलए कोर्ट Land Acquisition Court (भूमि अधिग्रहण न्यायालय) में जमा है, वहां भी विवाद या अन्य कारणों से जमीन का कब्जा नहीं मिलने पर निर्माण एजेंसी काम आगे नहीं बढ़ा पा रही है। ऐसे में एनएचएआई लगातार राज्य सरकार और जिला प्रशासन से लंबित भुगतान तथा जमीन का कब्जा उपलब्ध कराने का आग्रह कर रहा है। बावजूद इसके कई मामलों में बड़ी राशि अब भी लंबित है, जिससे करोड़ों की परियोजनाओं का काम प्रभावित हो रहा है। समय पहले सड़क बनती तो कई लाभ होते।

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