
रांची : माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा की आंसर की को लेकर फंसा पेंच अब सीधे अदालत के कमरे में सुलझेगा। झारखंड हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि इंटरनेट और पोर्टल की तकनीकी बाजीगरी का फैसला अब बयानों से नहीं, बल्कि सबके सामने लाइव ट्रायल से होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने जेएसएससी के कंप्यूटर और आईटी विशेषज्ञों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने का आदेश दिया है।
विकास पांडेय और अन्य परीक्षार्थियों की अर्जी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह अनोखा रास्ता निकाला है। अगली तारीख पर केवल आयोग के तकनीकी विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थी भी अपने ई-मेल आईडी और पासवर्ड के साथ कोर्ट में हाजिर रहेंगे। जज के सामने ही पोर्टल पर लॉग-इन करके देखा जाएगा कि आखिर माजरा क्या है। क्या वाकई अभ्यर्थियों की रेस्पॉन्स शीट और आंसर की साइट पर मौजूद है या उसे डाउनलोड करना मुमकिन ही नहीं है।
आखिर क्यों पैदा हुआ विवाद
परीक्षा देने के बाद जब अभ्यर्थियों ने अपना प्रदर्शन जांचने के लिए जेएसएससी की आधिकारिक वेबसाइट का रुख किया, तो वहां उनका स्वागत एक मैसेज से हुआ “User Does Not Exist”। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने सारे क्रेडेंशियल सही डाले थे, फिर भी पोर्टल उन्हें पहचानने से इनकार कर रहा है। इसी गड़बड़ी की वजह से वे अपनी आंसर की डाउनलोड नहीं कर पाए और मजबूरी में उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
JSSC का तर्क और कोर्ट का फैसला
दूसरी तरफ, जेएसएससी ने अदालत में हलफनामा पेश कर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। आयोग का कहना है कि हो सकता है परीक्षार्थियों ने खुद ही अपना ई-मेल या पासवर्ड टाइप करने में कोई गलती की हो, जिसकी वजह से स्क्रीन पर वैसा मैसेज दिखा। हालांकि, अभ्यर्थियों के वकील ने मांग की कि इस दावे की हवा निकालने के लिए एक्सपर्ट्स के सामने लाइव जांच कराई जाए। अदालत ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए अब 13 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है, जहां दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
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