
धनबाद : मधुबन थाने में फर्जीवाड़े और घूसखोरी का एक नया मामला सामने आया है। एक दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी का क्लेम पास कराने के लिए सनहा की कॉपी के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही थी। एक स्कॉर्पियो संख्या JH15K-4933 बीते 19 जुलाई को चैनपुर इलाके में हादसे का शिकार हो गई थी। खुशकिस्मती से इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन गाड़ी काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो गई थी।
गाड़ी के मालिक ने जब नुकसान की भरपाई के लिए इंश्योरेंस कंपनी (टाटा एआईजी) में क्लेम ठोका, तो कंपनी ने नियम के मुताबिक पुलिस थाने की लिखित रिपोर्ट (सनहा) जमा करने को कहा। इसी कागजी कार्रवाई को पूरा करने के लिए गाड़ी मालिक जब मधुबन थाने पहुंचा।
कानून की रक्षा करने वालों ने ही शुरू कर दिया खेल
कानून की रक्षा करने वालों ने ही खेल शुरू कर दिया। आरोप है कि मधुबन थाना प्रभारी दिपेश कुमार ने महज एक सनहा की कॉपी देने के बदले 5,000 रुपये की मांग की।
पीड़ित ने रिश्वत की यह मांग पूरी करने के बजाय सीधे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो धनबाद का दरवाजा खटखटाया और पूरी आपबीती सुनाई। शिकायत दर्ज होते ही एसीबी की टीम तुरंत हरकत में आई और गुप्त तरीके से मामले की जांच की। जांच में रिश्वत मांगने का आरोप पूरी तरह सही पाया गया। इसके बाद एसीबी ने थाना प्रभारी को बेनकाब करने के लिए एक मजबूत जाल बिछाया।
योजना के तहत जैसे ही पीड़ित थाने के अंदर पहुंचा, थाना प्रभारी दिपेश कुमार के इशारे पर विक्रम कुमार चौधरी नाम का एक व्यक्ति उनके कमरे में 5 हजार रुपये लेने लगा। ठीक उसी वक्त पहले से घात लगाए बैठी एसीबी की टीम ने मजिस्ट्रेट और स्वतंत्र गवाहों के सामने विक्रम को रंगे हाथ धर दबोचा। पुलिस ने रिश्वत के पैसे मौके पर ही जब्त कर लिए। इस पूरी कार्रवाई के बाद एसीबी ने मधुबन थाना प्रभारी दिपेश कुमार को भी मामले में नामजद आरोपी बनाया है और आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से शुरू कर दी है।
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